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कुल्लू में इनर अखाड़ा बाजार पर मंडराया खतरा, कभी भी दरक सकता है पहाड़; NDRF टीम ने किया सतर्क

By Davinder Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 17 Aug 2026 03:46 PM (IST)

कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार में सितंबर 2025 में हुए भूस्खलन के बाद भी खतरा बना हुआ है, जहां बड़े ...और पढ़ें

कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार के पास भूस्खलन संभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंची एनडीआरएफ। जागरण

कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार के पास भूस्खलन संभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंची एनडीआरएफ। जागरण

HighLights

  1. कुल्लू इनर अखाड़ा में सितंबर 2025 भूस्खलन का खतरा बरकरार।

  2. संवेदनशील पहाड़ी पर बड़े पत्थर और मलबा अभी भी लटके हैं।

  3. एनडीआरएफ टीम ने सुरक्षा कार्यों में देरी पर चिंता जताई।

संवाद सहयोगी, कुल्लू। जिला कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार में सितंबर 2025 में हुए दो भूस्खलन के करीब एक साल बाद भी खतरा टला नहीं है। संवेदनशील पहाड़ी पर बड़े पत्थर और मलबा अब भी खतरनाक स्थिति में लटका है। बारिश के बीच इसके गिरने की आशंका से स्थानीय लोग दहशत में हैं। स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू न होने से लोगों में प्रशासन के प्रति रोष बढ़ रहा है। सोमवार को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। 

टीम ने इतने लंबे समय बाद भी सुरक्षा कार्य शुरू न होने पर चिंता जताई। टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजेगी, ताकि आवश्यक कार्य जल्द शुरू हो सकें।

कभी भी दरक सकता है पहाड़

स्थानीय निवासी कंचन, नीलम, अंजू, सीता और प्रिया ने कहा कि करीब एक साल बाद भी खतरे का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। पहाड़ी से नीचे गिरने की स्थिति में मौजूद बड़े पत्थर और मलबा कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। हाल ही में संवेदनशील हिस्से में तिरपाल लगाए गए हैं, लेकिन पूरा क्षेत्र नहीं ढका गया है। बारिश में पानी के रिसाव और मिट्टी खिसकने की आशंका बनी हुई है।

समिति की अंतिम मंजूरी के इंतजार में लटका काम

जलशक्ति विभाग के अनुसार भूस्खलन रोकने के लिए सुरक्षा दीवार बनाने का प्रस्ताव परियोजना आकलन समिति और तकनीकी अनुमोदन समिति से मंजूर हो चुका है। राज्य अनुमोदन समिति की अंतिम मंजूरी के बाद निर्माण शुरू होगा। मठ क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की योजना को भी परियोजना आकलन समिति से मंजूरी मिल चुकी है।

लोगों में दहशत

लोगों ने मांग की है कि लटके पत्थर-मलबा तत्काल हटाया जाए, तिरपाल से पूरा संवेदनशील क्षेत्र ढका जाए और सुरक्षा दीवार व जल निकासी का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाए।

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