संवाद सहयोगी, कुल्लू : जिला कुल्लू में हाल ही में हुई बारिश और ऊंचाई पर हुई बर्फबारी से घाटी के किसान बागवानों को राहत पहुंचाई है। किसानों ने रबी की खेती के साथ-साथ मटर की खेती भी शुरू कर दी है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में बीज उनको नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में विभाग ने और डिमांड भेजी है।

गत दिनों हुई बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी हो गई, जो गेहूं व मटर की बिजाई के लिए उपयुक्त है। कुल्लू में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अधिक मटर की बिजाई कर रहे हैं। पिछले वर्ष छह क्विटल और इस वर्ष अभी तक आठ क्विंटल मटर का बीज मंगवाया गया था। कुछ दिनों से भुंतर, सहित अन्य कई जगहों पर मटर का बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अब किसानों की समस्या भी बढ़ गई है।

कृषि विभाग की ओर से मटर की और सप्लाई मंगवाई गई है। घाटी के किसान सचिन, सुरेश, चेतन नेगी, दीपा कुमारी, हेमंत आदि का कहना है कि नवंबर में हुई बारिश से रबी की फसल बिजाई के लिए अनुकूल है। बारिश के बाद किसानों को राहत मिली है।

किसानों ने बताया कि हम लोग अच्छी गुणवत्ता वाले बीज को कृषि विभाग के कृषि प्रसार केंद्रों से खरीदकर अपने खेतों में लगा रहे हैं।

उधर, उंचाई वाले क्षेत्र कुल्लू, मणिकर्ण, आनी, बंजार, सैंज के बागवानों ने पर्याप्त नमी के चलते सेब के बगीचों की ओर भी अपना रुख कर लिया है। कुछ बागवानों ने अभी से सेब के तौलिए तैयार करने आरंभ कर दिए हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बागवान हर साल बर्फबारी होने से पहले अपने बगीचों में प्रूनिग और तौलिए बनाने का काम पूरा करते हैं। इस वर्ष समय पर बारिश होने से खेतों में पर्याप्त नमी है। इस कारण इस वर्ष मटर की कुल्लू जिला में आठ क्विटल बीज मंगवाया था इसके बावजूद भी अभी किसान बागवानों की डिमांड आ रही है। इसके लिए और बीज की डिमांड विभाग की ओर से भेजी गई है, ताकि किसानों को बीज उपलब्ध हो सके।

राजपाल शर्मा, उपनिदेशक कृषि विभाग कुल्लू ।

Posted By: Jagran

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