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हिमाचल में उभरा नया पर्यटन स्थल, भगवान के सिंहासन का प्रतीक गोमो रंजन पर्वत बना हॉट स्पॉट; मनाली से 155 KM दूरी

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 14 Sep 2026 01:25 PM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 01:44 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति में शिंकुला दर्रे के पास स्थित गोमो रंजन पर्वत एक नया पर्यटन स्थल बन गया है, जिसे भगवान के सिंहासन के रूप में जाना जाता है।

लाहुल स्पीति के शिंकुला में गोमो रंजन पर्वत व यहां पहुंचे पर्यटक।

लाहुल स्पीति के शिंकुला में गोमो रंजन पर्वत व यहां पहुंचे पर्यटक।

HighLights

  1. गोमो रंजन पर्वत लाहुल-स्पीति में नया पर्यटन स्थल बना।

  2. पर्वत अपनी अनोखी आकृति के कारण भगवान का सिंहासन कहलाता है।

  3. बीआरओ ने शिंकुला दर्रे तक पहुंच आसान कर पर्यटन बढ़ाया।

जागरण संवाददाता, मनाली। हिमाचल प्रदेश के लाहुल स्पीति में शिंकुला का गोमो रंजन पर्वत पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। यह नया पर्यटन स्थल बनकर उभरा है। यह पर्वत अपनी आकृति के कारण भगवान शिव के सिंहासन के नाम से भी जाना जाता है। लाहुल घाटी और लद्दाख के जंस्कार घाटी को जोड़ने वाले सामरिक रूप से महत्वपूर्ण शिंकुला दर्रे (16,580 फीट) के निकट स्थित गोमो रंजन पर्वत इन दिनों पर्यटकों का नया आकर्षण बन गया है।

इसकी अनोखी बनावट व अलौकिक सुंदरता के कारण देश-विदेश से सैलानी यहां पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में इस पर्वत का दीदार करने आ रहे हैं। 

पहले, इन वादियों में पहुंचने के लिए बारालाचा, लेह लद्दाख और कारगिल होकर 900 किमी का कष्टदायक सफर करना पड़ता था, लेकिन अब बीआरओ ने इस यात्रा को घटाकर आठ से दस घंटे का कर दिया है।

दारचा शिंकुला से जा रहे और जंस्कार लेह से बारालाचा होकर आ रहे वापस

बीआरओ की ओर से सड़कों का जाल बिछाने से पर्यटक दारचा शिंकुला से जंस्कार होते हुए लेह जा रहे हैं और बारालाचा होकर मनाली लौट रहे हैं। एडवेंचर प्रेमियों, ट्रैकर्स और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी जन्नत से कम नहीं है। आफ-बीट डेस्टिनेशन की तलाश में आने वाले सैलानी यहां घंटों इस अद्भुत नजारे को कैमरे में कैद कर रहे हैं। 

गोमो रंजन पर्वत टूरिस्ट स्पॉट

गोमो रंजन के प्रसिद्ध होने से शिंकुला रूट पर पर्यटन को नया आयाम मिला है और यह लाहुल का सबसे हाट टूरिस्ट स्पॉट बनकर उभरने की संभावना है। जंस्कार घाटी को मनाली से 12 महीने जोड़े रखने के लिए बीआरओ शिंकुला दर्रे में 4.4 किमी टनल का निर्माण कर रहा है।

टेंट में ठहरने की व्यवस्था

यहां पहाड़ों के बीच ठहरने का अनुभव भी ले सकते हैं। यहां पर टेंट में सारी व्यवस्था रहती है, जिसमें खानपान से लेकर रात को ठहरने का भी इंतजाम है। 

मनाली से कर सकते हैं अप-डाउन

गोमो रंजन पर्वत तक पहुंचने के लिए मनाली से टैक्सी सेवा उपलब्ध है। मनाली से टैक्सी लेकर पर्यटक दारचा से शिंकुला होकर करीब 155 किलोमीटर दूर गोमो रंजन पर्वत पहुंच सकते हैं। रात को रुकने के लिए दारचा, जिसपा, केलंग व सिस्सु में व्यवस्था है। बीआरओ ने बेहतर सड़क बनाई है, इस कारण पर्यटक सुबह मनाली से चलकर गोमो रंजन घूमकर शाम को मनाली भी लौट सकते हैं।

भगवान के सिंहासन के नाम से जाना जाता है गोमो रंजन पर्वत

स्थानीय निवासी पलजोर, तेंजिन, डोलकर और टशी ने बताया कि यह पर्वत 'गॉड थ्रोन' यानी भगवान का सिंहासन के नाम से प्रसिद्ध है। विशाल एकल चट्टान के रूप में खड़ी यह चोटी दूर से ही एक पवित्र सिंहासन जैसी दिखाई देती है। बौद्ध समुदाय के लिए इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, जिससे यह आस्था का केंद्र बन गया है। उन्होंने बताया कि शिंकुला दर्रे से सड़क बनने के बाद यह पर्यटन स्थल बहुत लोकप्रिय हुआ है। वहीं, हिंदू धर्म के लोग इसे भगवान शिव के सिंहासन की तरह मानते हैं।

इस साल पर्यटकों की संख्या हुई दोगुना

सीमा सड़क संगठन द्वारा मनाली-दारचा-पदुम-लेह मार्ग को बेहतर बनाने के बाद अब पर्यटक आसानी से यहां पहुंच पा रहे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण इस साल यहां पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। स्थानीय लोगों ने गोमो रंजन पर्वत की खूबसूरती की प्रशंसा की है। 

शिंकुला दर्रा नए पर्यटनस्थल के रूप में उभरकर सामने आया है। अटल टनल मार्ग होकर सैलानी अब सर्दियों में भी शिंकुला पहुंच सकेंगे।
-किरण भंडाना, उपायुक्त, लाहुल स्पीति।

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