मनाली, जसवंत ठाकुर। World Tourism Day, 1990 के दशक में पर्यटन नगरी कुल्लू मनाली की वादियां जब अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभरी तो कुल्लू मनाली में नाममात्र पर्यटन स्थल थे तथा पर्यटकों का आंकड़ा भी सालाना डेढ़ दो लाख से ऊपर नहीं बढ़ता था। लेकिन अब कुल्लू मनाली में दर्जनों पर्यटन स्थल उभरकर सामने आए हैं और पर्यटकों का आंकड़ा भी 50 लाख तक पहुंचने लगा है। अटल टनल रोहतांग बनने के बाद अब कुल्लू मनाली के साथ शीत मरुस्थल लाहुल स्पीति भी जुड़ गई है। पहले एक दो दिन ही पर्यटक मनाली में रुक पाते थे। लेकिन अब नए पर्यटन स्थलों के विकसित हो जाने से पर्यटक एक सप्ताह तक इन वादियों में घूम सकते हैं।

कुल्लू मनाली व लाहुल स्पीति में बर्फ से भरे पहाड़ व झरने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। प्रकृति प्रेमियों और रोमांच पसंद लोगों के लिए यहां घूमने की बहुत सी जगह हैं। बर्फ से ढके पहाड़, ब्यास, पार्वती व चंद्र भागा नदियां, घाटियां, अदभुत नजारे पर्यटकों को रुकने में मजबूर कर रहे हैं। देश-विदेश के पर्यटकों के लिए छुट्टी बिताने की कुल्लू मनाली व लाहुल स्पीति बेहद मशहूर जगह बन गई है।

यह स्थान साहसिक खेल के शौकिनों, छुट्टी मानने वाले परिवारों और हनीमून कपल्स को अपनी ओर खींच रहे हैं। अगर आप भी कुल्लू मनाली व लाहुल स्पीति घूमने आ रहे हैं तो इन स्थानों में जरूर जाएं

हिडिम्बा मंदिर

यह मंदिर महाभारत के पाडंवों (पांच भाइयों) में से एक भीम की पत्नी हिडिम्बा देवी को समर्पित है। 1553 में इस मंदिर का निर्माण किया गया और यह मंदिर डूंगरी पार्क के बीच में स्थित है। इसकी संरचना चार-स्तरीय शिवालय आकार की छत और नक्काशीदार प्रवेश द्वार जो हिंदू देवताओं और प्रतीकों से अलंकृत है। भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच की पूजा एक पवित्र वृक्ष के रूप में की जाती है।

मनु मंदिर

मनाली गांव में स्थित मनु मंदिर मनाली बाज़ार से एक किमी दूर है। मान्यता है कि जब धरती पर प्रलय आई थी तो मनु की किस्ती इसी गांव में आकर रुकी थी। मनु ऋषि ने सृष्टि की रचना यहीं से की थी। इस मंदिर में मेडिटेशन के लिए देश ही नहीं विदेश के पर्यटक भी आते हैं और साधना करते हैं।

वशिष्ठ ऋषि मंदिर व गर्म पानी के कुंड

यह मंदिर मनाली से चार किमी की दूरी पर है। वशिष्ठ वैदिक काल के विख्यात ऋषि थे। वशिष्ठ एक सप्तर्षि हैं।  यानि उन सात ऋषियों में से एक जिन्हें ईश्वर द्वारा सत्य का ज्ञान एक साथ हुआ था और जिन्होंने मिलकर

वेदों की रचना की। वशिष्ठ राजा दशरथ के राजकुल गुरु भी थे। यहां गर्म पानी के चश्में भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यह धार्मिक पर्यटन स्थल भी है जहां हर साल दूर दूर से देवी देवता शाही स्नान को आते हैं।

 ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मण ने इस इसी भूमि में तीर चलाकर इस कुंड को बनाया था। यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए स्नान की सुविधा उपलब्ध है। यहां आसपास दो मंदिर है जो राम और ऋषि वशिष्ठ को समर्पित है।

सोलंग घाटी

मनाली से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित यह खूबसूरत वैली एडवेंचर, खेल और स्कीइंग के लिए बेहद ही मशहूर है। गर्मियों में यहां पैराग्लाइडिंग, ज़ोरबिंग (चक्र), माउंटेन बाइकिंग (पहाड़ो पर बाइक चलाना) और घुड़सवारी का लुत्फ उठा सकते है। सर्दियों के मौसम में विशेषकर जनवरी और मार्च के बीच में यहां स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और स्लेजिंग का भी आनंद उठा सकते है। यहां सर्दियों में स्कीइंग फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। पर्वातारोहण संस्थान मनाली भी यहां स्कीइंग के प्रशिक्षण करवाता है।

पर्यटन स्थल फातरू

सोलंग घाटी में बना रोपवे भी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। रोपवे के निर्माण से पर्यटन स्थल फातरु भी विकसित हुआ है। फातरु से बर्फ से ढके पहाड़ और ग्लेशियर का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। एक किमी लंबे इस रोपवे का सफर हर पर्यटकों को रोमांचित करता है।

पर्यटन स्थल अंजनी महादेव

सोलंग से दो किमी दूर पर्यटन स्थल अंजनी महादेव है। यहां सर्दियों में बर्फ से शिवलिंग बनती है जिसका आकार शिवरात्रि के समय 35 से 40 फीट हो जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग में माता अंजनी ने पुत्र प्राप्ति और मुक्ति पाने के लिए तपस्या की थी और भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। तभी से यहां पर प्राकृतिक तौर पर बर्फ का शिवलिंग बनता है।

सबकी पसंद रोहतांग दर्रा

बर्फ से ढका यह दर्रा (पास) लेह राजमार्ग पर स्थित है और यह पास प्रत्येक वर्ष केवल जून से अक्टूबर माह में खुला रहता है। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 3,979 मीटर है। यहां से ग्लेशियर, हिमालय की चोटियों और नदी का खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है। यह रास्ता लाहुल-स्पीति, पांगी और लेह जाने का प्रवेशद्वार है। बढ़ती लोकप्रियता के कारण टूरिस्ट सीजन में रोहतांग मार्ग अक्सर पर्वतारोही पर्यटकों से भरा रहता है। पर्यटकों के लिए स्कीइंग और पास (दर्रे) पर स्लेजिंग (बर्फ पर चलने वाली गाड़ी) और खुबसूरत तस्वीरों को कैद करने के बहुत से विकल्प मौजूद होते हैं।

पर्यटन स्थल नग्गर

नग्गर कभी कुल्लू की पुरानी राजधानी हुआ करता था। यह शहर ब्यास नदी के बाईं ओर स्थित है, जो मनाली से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर है। इसकी स्थापना राजा विशुद्पाल द्वारा की गई थी, और 1460 ई में नई राजधानी सुल्तानपुर में स्थानांतरित होने तक यह स्थान राजनीति का केन्द्र बना रहा। यहां का मुख्य आकर्षण एक किला है, अब इस किले को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा एक हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है। यह इमारत पश्चिमी हिमालय वास्तुशैली का बेहतरीन नमूना है। ये लकड़ियों और पत्थरों से बना है और इसकी खिड़कियां और दरवाजो पर नक्काशी की गई है। परिसर के अंदर एक छोटा संग्रहालय, एक मंदिर और खूबसूरत रेस्तरां है। नग्गर में एक मशहूर रूसी चित्रकार निकलाय रेऱिख का घर भी था, वे यहां 1929 तक रहे और 1947 में उनकी मृत्यु हो गई। अब उनके घर को एक आर्ट गैलरी में बदल दिया गया है। इस गैलरी में हिमालय पर्वत श्रंखला से जुड़े रंगीन चित्रों को प्रदर्शित किया जाता है।

पर्यटन स्थल मणिकर्ण

पार्वती नदी के दाई ओर स्थित, मणिकर्ण अपने गर्म पानी के झरने के लिए प्रसिद्ध है। यह हिंदू और सिख श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है, लोग इस गर्म झरने में डुबकी लगाने के लिए आते है, जो चिकित्सकीय गुण के लिए माना जाता है। पौराणिक कथाओं अनुसार, एक विशाल सर्प (सांप) ने भगवान शिव की पत्नी पार्वती की बाली चुरा ली और यहां मैदान के बाहर फेंक गया। शहर में गुरू नानक जी का एक विशाल गुरुद्वारा स्थित है, जिसका निर्माण 1940 में संत बाबा नारायण हर जी ने किया था। पुरूषों और महिलायों के स्नान के लिए इसके नजदीक एक नदी भी है। इसके समीप में रघुनाथ मंदिर और नैनी देवी मंदिर भी स्थित है।

पर्यटन स्थल हामटा

हिमाचल सरकार ने रोहतांग की तर्ज पर हामटा को विकसित किया है। सैलानी यहां मई जून तक बर्फ के दीदार करते हैं। सर्दियों में तो यह स्थल सैलानियों की पहली पसंद बनता है। सर्दियों में स्थानीय युवा यहां इग्लू का निर्माण करते है जो सैलानियों को खूब भाते हैं।

लाहुल घाटी में कोकसर  व सिस्‍सू

कोकसर लाहुल का पहला गांव और गेट रास्ता है। यह गांव 3140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चंद्र नदी के दाहिने किनारे पर। बाएं किनारे पर भी आवास है। मनाली से स्पीति जाने वाले पर्यटक अटल टनल से कोकसर होकर ही जाते हैं। यह गांव चन्द्रा नदी के दाहिने किनारे पर 3130 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गांव चंद्र नदी के ऊपर एक विस्तृत फ्लैट जमीन पर स्थित है। खेत आलू, मटर, जौ और गेहूं गेहूं के साथ हरे हैं। इस

पर्यटन स्थल पर राजा घेपन का मंदिर है। राजा घेपन समस्त लाहुल के आराध्यदेव हैं। आते जाते हर व्यक्ति राजा घेपन से सुख शान्ति का आशीर्वाद लेते हैं।

गोंदला और तांदी पर्यटन स्थल

यह गांव जिला मुख्यालय केलंग से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्लेशियरों और बर्फ के पहाड़ों

का नजारा यहां देखते ही बनता है। यहां का गोंदला किला सैलानियो के आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा तांदी गांव पटल घाटी में चंद्र और भगा नदियों के संगम से ऊपर स्थित है। यह स्थल पांडवों की पत्नी द्रौपदी से जुड़ा हुआ है। द्रोपदी ने इस जगह पर अपना शरीर त्यागा था।

लाहुल-स्‍पीति का मुख्‍यालय केलंग

केलंग लाहुल स्पीति का जिला मुख्यालय है। लेह जाने वाले पर्यटक यहां से होकर गुजरते हैं। यह एक नियमित बाजार के साथ सभी वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र केंद्र भी है।

जिस्पा व सरचू

यह सुंदर स्थान केलंग से 22 किलोमीटर दूर और गेमूर से 4 किलोमीटर दूर है। लेह मनाली के बीच सफर करने वाले पर्यटक यहां रुकते हैं। सरचू एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहां पर्यटक टेंट में रात बिताते हैं। मनाली व लेह के बीच स्थित यह पर्यटन स्थल सभी राहगीरों को सुरक्षा भी प्रदान करता है।

सूरज ताल व चंद्र ताल झील

सूरज ताल या सूर्य देवता की झील बरलाचा ला के शिखर पर स्थित है। यह 16000 फीट की ऊंचाई से थोड़ा नीचे है। भागा नदी इस झील से उगती है जो राजमार्ग के ठीक नीचे एक सुंदर प्राकृतिक एम्फीथिएटर में स्थित है। चंद्रताल की प्राकृतिक झील 14,000 फीट और कुंजम पास से करीब 9 किमी दूर स्थित है। झील एक व्यापक घास के मैदान में स्थित है जो प्राचीन काल में एक ग्लेशियर था।झील में पानी इतना स्पष्ट है कि इसके तल पर पत्थर आसानी से दिखाई देते हैं।

स्पीति घाटी

स्पीति नदी कुंजम रेंज के आधार पर निकलती है और किन्नौर में खाब में सतलुज में शामिल होती है। स्पीति के कई गांव व मठ ढंकर गोंपा, ताबो, कुंगरी, लिदांग, हिक्किम, सगमम, माने और गिउ गोंपा पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma