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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लाहुल-स्‍पीति में ठंड बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों का रुख करने लगे आइबैक्‍स, मायड़ घाटी में दिखा झुंड

By Virender KumarEdited By:
Published: Mon, 15 Nov 2021 06:50 PM (IST)

लाहुल-स्पीति की पहाड़ियों में पारा लुढ़कते ही पानी जमना शुरू हो गया है। हालांकि अभी आइबैक्स का झुंड मायड़ घाटी ...और पढ़ें

लाहुल-स्‍पीति में ठंड बढ़ने के साथ आइबैक्‍स ग्रामीण क्षेत्रों का रुख करने लगे हैं।
लाहुल-स्‍पीति में ठंड बढ़ने के साथ आइबैक्‍स ग्रामीण क्षेत्रों का रुख करने लगे हैं।

मनाली, जागरण संवाददाता। लाहुल-स्पीति की पहाड़ियों में पारा लुढ़कते ही पानी जमना शुरू हो गया है। 3500 से 6000 मीटर की ऊंचाई में रहने वाले वन्य प्राणी अब ग्रामीण क्षेत्रों का रुख करने लगे हैं। हालांकि अभी आइबैक्स का झुंड मायड़ घाटी में ही देखा गया है, जिसमें 10-12 आइबैक्‍स दिख रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होगी वैसे-वैसे वन्य प्राणी ग्रामीण क्षेत्रों का रुख करेंगे। ग्रामीण पलजोर, सोनम व तंडुप ने बताया कि मायड़ घाटी में आइबैक्स का एक झुंड दिखा है। पहाड़ों पर पानी जमने के चलते वन्य प्राणी ग्रामीण क्षेत्रों का रुख करने लगे हैं।

दूसरी ओर, आइबैक्‍स जैसे दुर्लभ प्राणी को बचाने के लिए लाहुल-स्पीति जिले में समस्त महिला मंडलों सहित कई पंचायतों ने कड़े कदम उठाए हैं। इस दुर्लभ प्राणी आइबैक्स का शिकार करता हुए यदि कोई व्यक्ति पकड़ा जाता है तो उस व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार किया जाता है और उसका हुक्का पानी बंद कर दिया जाता है। यही कारण है कि हर आदमी के जागरूक होने से दुनिया में लगभग 6000 संख्या वाले विलुप्तप्राय हिमालयन आइबैक्स की संख्या अब हिमाचल के कबाइली क्षेत्र लाहुल-स्पीति में धीरे-धीरे बढ़ने लगी है।

रेड लिस्‍ट में डाला है आइबैक्‍स

आइबैक्स को इंटरनेशनल यूनियन फार कंजरवेशन आफ नेचर की ओर से रेड लिस्ट में डाला गया है। यह अफगानिस्तान, चीन, कजाकिस्तान, मंगोलिया, पाकिस्तान, रूस और उज्बेकिस्तान के साथ भारत में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के लाहुल-स्पीति में ही पाए जाते हैं। जहां दुनिया भर में इनकी घटती संख्या के लिए वन्य जीव प्रेमी चिंतित हैं वहीं दूसरी ओर हिमाचल सरकार की ओर से अभी तक इन दुर्लभ प्रजाति के इनकी संख्या को लेकर गणना तक नहीं की गई है। वन्य प्राणी विभाग की मानें तो स्थानीय महिला मंडलों का पूरा साथ मिलता है, जो जंगली जानवरों के संरक्षण को लेकर बेहतर काम कर रही हैं।

पिछले कुछ साल से देखने को मिल रहे दुर्लभ वन्‍य प्राणी

जिला परिषद लाहुल-स्‍पीति की अध्यक्ष अनुराधा राणा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों से लाहुल-स्पीति जिला में यह दुर्लभ प्राणी बिना डर के ग्रामीण क्षेत्र में घूमते हुए देखने को मिल रहे हैं। पिछले साल गोदला गांव में दो आइबैक्स घर की छत पर काफी देर बैठे रहे। बिलिंग गांव में एक आइबैक्स घर के बरामदे में घूमता दिखा। स्पीति के कई गांवों में बर्फीला तेंदुआ सर्दियों में हर कहीं देखने को मिल रहा है। तेंदुए के आसानी से दिखने के कारण स्पीति में वन्य प्रेमी सर्दियों में भी घूमने आ रहे हैं।

संरक्षण के लिए बनाई है पेट्रोलिंग टीम

वन विभाग लाहुल के डीएफओ दिनेश शर्मा ने कहा कि सर्दियां आने पर आइबैक्स के साथ अन्य वन्य प्राणी घाटी के निचले इलाकों का रुख करते हैं। वन विभाग ने इनके संरक्षण के लिए एक पेट्रोलिंग टीम का गठन किया है। जो समय-समय पर उन जगहों पर जाकर वन्य प्राणियों पर नजर रखती है।

यह है आइबैक्‍स की पहचान

हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में पाए जाने वाले हिमालयन आइबैक्स को जंगली बकरे के नाम से भी जाना जाता है। इनके लंबे-लंबे और मुड़े हुए सींग होते हैं। इस हिमालयन आइबैक्स को साइबेरियन आइबैक्स की उपप्रजाति कहा जाता है। एक स्वस्थ नर आइबैक्स का वजन 150 किलो तक होता है और नर का वजन मादा के मुकाबले अधिक होता है। आइबैक्स छोटे-छोटे झुंडों में रहते हैं और एक झुंड में इनकी संख्या 50-60 तक हो जाती है। आइबैक्स घास खाते हैं। ये बर्फानी तेंदुओं के आसान शिकार होते हैं। बेहद कठिन परिस्थितियों और खड़ी चट्टानों में रहने वाले हिमालयन आइबैक्स की संख्या घटी है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति में पिछले एक दशक से इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है।