पालमपुर, जेएनएन। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ राज्य प्रबंधन सदस्य, प्रदेश कर्मचारी संघर्ष मोर्चा व पंचरुखी ब्लॉक अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने वर्ष 2008 व 2009 में पुराने आरएंडपी नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों को हाईकोर्ट के फैसले अनुसार नियमित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार अनुबंध के आरएंडपी नियम अक्टूबर 2009 में बने थे, मगर इससे पहले की नियुक्तियों को अनुबंध पर रखना गैरकानूनी है।

फैसले के 90 दिन बाद भी इन शिक्षकों को न्याय नहीं मिला है। उन्होंने रोष जताया कि एलपीए-54 के अनुसार 2008 व 22 अक्टूबर 2009 के समय नियुक्त अध्यापक पुराने आरएंडपी नियमों के दायरे में आते हैं मगर सरकार को उनकी बात सुनने व वार्ता करने के लिए समय नहीं है। प्रवीण कुमार ने कहा कि हमारे कुछ अध्यापक साथी सिर्फ तीन साल नियमित नौकरी करने के बाद रिटायर हो चुके हैं और पुराने नियम होने के बाबजूद सात साल का अनुबंध समय कटवाया गया।

प्रदेश सरकार हाई कोर्ट के फैसला माने अन्यथा 2008 में अनुबंध पर नियुक्त टीजीटी अध्यापक, आज भी टीजीटी हैं और टीजीटी ही रिटायर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि छुट्टी के बाद आय बढ़ाने के लिए अध्यापक निजी अकादमी में बच्चों को पढ़ाते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने सरकार से प्रदेश में अनुबंध प्रथा बंद करने व अनुबंध शिक्षकों को हाईकोर्ट के फैसले अनुसार नियुक्ति तिथि से नियमित किए जाने की मांग की है।

Posted By: Rajesh Sharma

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