टांडा मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु डॉक्टर से छेड़छाड़, लैब असिस्टेंट ने गलत तरीके से कंधे पर हाथ रखा; पीछे से पकड़ा
टांडा मेडिकल कॉलेज में एक पीजी प्रशिक्षु डॉक्टर ने ब्लड बैंक लैब असिस्टेंट पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। डॉक्टर ...और पढ़ें

टांडा मेडिकल कॉलेज में पीजी डॉक्टर से छेड़छाड़ हुई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
पीजी प्रशिक्षु डॉक्टर ने ब्लड बैंक लैब असिस्टेंट पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
रोगी के लिए प्लेटलेट्स लेने के दौरान लैब असिस्टेंट ने की छेड़छाड़।
चिकित्सा अधीक्षक को शिकायत सौंपी गई, मामले में बैठकों का दौर जारी।
जागरण संवाददाता, टांडा। हिमाचल प्रदेश में डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा की पीजी प्रशिक्षु डॉक्टर ने ब्लड बैंक के लैब असिस्टेंट पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। उन्होंने इसकी शिकायत चिकित्सा अधीक्षक डा. विवेक बन्याल से की है। घटना सोमवार शाम 4:30 बजे की है। मंगलवार को दिनभर चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में इस संबंध में बैठकों का दौर जारी रहा। इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई मेडिकल कालेज एवं अस्पताल प्रशासन से अभी कोई जानकारी नहीं दी गई।
एमएस को सौंपी शिकायत
ओबीजी विभाग की प्रथम वर्ष की पीजी प्रशिक्षु डाक्टर ने चिकित्सा अधीक्षक को सौंपी शिकायत में कहा है कि वह 28 सितंबर को सायं करीब 4:30 बजे रोगी के लिए प्लेटलेट्स की व्यवस्था करने ब्लड बैंक में गई थीं। मरीज की हालत को देखते हुए इमरजेंसी में उसका सीजेरियन करने की योजना बनाई थी।
मरीज को एब्रप्शियो प्लेसेंटा के साथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया था और प्लेटलेट काउंट करीब 70,000 प्रति माइक्रोलीटर था। ऐसे में आपात स्थिति के लिए प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी था।
दोनों हाथों से पीछे से पकड़ लिया
उनके मुताबिक ब्लड बैंक में ड्यूटी पर तैनात तकनीशियन जोनी धीमान से प्लेटलेट्स की उपलब्धता के बारे में पूछा तो पहले उन्होंने इन्कार कर दिया। बाद में स्टोरेज क्षेत्र में जाकर जांच करने को कहा। वहां जाते समय उसने कई बार उनके कंधे के आसपास हाथ रखा, जिससे उन्होंने असहज महसूस किया। इतना ही नहीं जब वह फार्म भर रही थीं और लैब असिस्टेंट की तरफ पीठ किए हुए थीं, तभी वह पीछे से आया और दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने तत्काल खुद को छुड़ाया और वहां से चली गईं।
सीनियर डॉक्टर को बताया
शिकायत के मुताबिक, घटना के बाद वह काफी असहज और परेशान थीं और तत्काल मामले की जानकारी नहीं दे सकीं। करीब तीन-चार घंटे बाद उन्होंने वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर्स को इसके बारे में बताया। उनकी सलाह पर मामले की लिखित शिकायत की है। प्लेटलेट्स की उपलब्धता और आपात स्थिति में उन्हें जारी किए जाने संबंधी लिखित दस्तावेज की आवश्यकता थी। इस संबंध में भी ब्लड बैंक कर्मचारी से बातचीत हुई थी।
पीड़िता ने स्पष्ट किया है कि वह ब्लड बैंक में रोगी के लिए प्लेटलेट्स की आवश्यक व्यवस्था करने के लिए पेशेवर जिम्मेदारी के तहत गई थीं। उन्होंने आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
एमएस ने नहीं रिसीव की कॉल
उधर, चिकित्सा अधीक्षक डा. विवेक बन्याल से उनके मोबाइल फोन नंबर पर इस संबंध में प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाई।
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