शिमला, यादवेन्द्र शर्मा। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हर कोई जद्दोजहद कर रहा है। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मरीज नहीं चाहता कि उसकी ऐसी हालत हो कि अस्पताल जाना पड़े। उधर अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस सबके बीच मिशन अगेंस्ट टयूबर क्लाेसिस एंड कैंसर संस्था मुफ्त आक्सीजन उपलब्ध करवा रही है, इससे दोहरा लाभ हो रहा है आक्सीजन की कमी वाले मरीजों को घर पर ही मुफ्त आक्सीजन मिल रही है और आक्सीजन की कमी के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में भी कुछ कमी आ रही है। घर पर आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए आक्सीजन की कमी होने पर एक मात्र विकल्प है कि या तो अस्पताल जाएं या फिर डेढ़ लाख रुपये का आक्सीजन कंसंट्रेटर ले लें। हर कोई इसे नहीं खरीद सकता है। ऐसे में कोरोना काल में गैर सरकारी संस्था मैटकाक यानी मिशन अगेंस्ट टयूबर क्लाेसिस एंड कैंसर संस्था ऐसे मरीजों को मुफ्त आक्सीजन उपलब्ध करवा रही है।

गैर सरकारी संस्था ने इसके लिए शिमला में दो सोलन व चंडीगढ़ में एक-एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर रखा हुआ है। जिसे आक्सीजन की आवश्यकता होती है उसे मुफ्त में उपयोग करने के लिए आक्सीजन कंसट्रेटर उपलब्ध करवाया जाता है। यह संस्था अभी तक करीब दस परिवाराें को मदद कर चुकी है, इनमें से दो से तीन परिवार तो ऐसे थे जिनके तीन से चार सदस्यों को आक्सीजन की कमी हो गई थी और इससे उन्हें लाभ मिला। संस्था को आक्सीजन के लिए दिल्ली और नोएडा से भी फोन आ रहे हैं। शिमला और सोलन में भी काफी तादाद में होम आइसोलेशन में रहने वालों के आक्सीजन की मांग को लेकर फोन आ रहे हैं।

आइसोलेशन में रह रहे काेरोना मरीजों को शुरू किया मुफ्त खाना

मिशन अगेंस्ट टयूबर क्लाेसिस एंड कैंसर संस्था ने कोरोना मरीजों की सहायता के लिए मुफ्त खाना शुरु किया है। ये संस्था करीब छह वर्षों से कैंसी और टळबी रोग को लेकर जागरुकता और मदद का कार्य कर रही है। कोरोना की पहली लहर के दौरान भी गैर सरकारी संस्था ने मुफ्त आनाज बांटने के साथ अन्य मदद की थी।

क्या कहते हैं संस्था के अध्यक्ष

मिशन अगेंस्ट टयूबर क्लाेसिस एंड कैंसर संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता सुमित शर्मा का कहना है मिशन अगेंस्ट टयूबर क्लाेसिस एंड कैंसर संस्था टीबी व कैंसर रोगियाकं के लिए कई वर्षों से मदद कर रही है। संस्था ने गंभीर रोगियाें की मदद के लिए साठ-साठ हजार रुपये के खरीदे थे अब तो मांग बढ़ने के साथ इनकी कीमत डेढ़ लाख रुपये तक है। आम व्यक्ति के लिए इसे खरीदना भी मुश्किल है। जिसे जरूरत होती है वे बिजली के प्लग में लगाते ही इससे आक्सीजन बननी शुरु हो जाती है।