शिमला-मटौर फोरलेन: घट्टा टोल प्लाजा पर पूरी फीस वसूलने को हिमाचल हाई कोर्ट में चुनौती, अभी अधूरा है हाईवे
हिमाचल हाई कोर्ट में शिमला-मटौर फोरलेन के घट्टा टोल प्लाजा पर पूरी फीस वसूलने को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ...और पढ़ें

शिमला मटौर फोरलेन पर घट्टा टोल पर पूरी फीस वसूलने को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
घट्टा टोल प्लाजा पर पूरी टोल फीस वसूली को चुनौती।
फोरलेन अधूरा होने पर भी पूरा टोल वसूलने का आरोप।
हिमाचल हाई कोर्ट ने भारत संघ, एनएचएआई को नोटिस जारी किया।
जागरण संवाददाता, धर्मशाला। शिमला-मटौर फोरलेन पर घट्टा टोल प्लाजा में पूरी फीस लेने को लेकर हिमाचल हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। भंगवार रानीताल से कांगड़ा बाईपास तक पूरे मार्ग की टोल फीस वसूली जा रही है, जबकि फोरलेन अभी अधूरा है। राजिंदर कुमार एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं एनएचएआई मामले की 22 सितंबर को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पारस शर्मा ने टोल वसूली को लेकर कई सवाल न्यायालय के समक्ष रखे।
नोटिस जारी करने के निर्देश
हाई कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए भारत संघ व एनएचएआई को नोटिस जारी करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि घट्टा टोल प्लाजा भंगवार रानीताल से कांगड़ा बाईपास एनएच 303/503 पर स्थित है और यहां टोल वसूला जा रहा है।
टनल व पुल अभी परिचालन में नहीं
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भंगवार से कांगड़ा बाईपास तक पूरे हिस्से के लिए टोल लिया जा रहा है, जबकि संबंधित टनल अभी परिचालन में नहीं है और कछियारी की ओर जोड़ने भंगवार रानीताल को आपस में जोड़ने वाले पुल पर यातायात भी अभी सुचारू नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि जब यात्रियों को पूरे फोरलेन मार्ग और उससे संबंधित आधारभूत ढांचे की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तब पूरी टोल फीस वसूली से यात्रियों पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ रहा है। याचिका में इसे यात्रियों की कीमत पर अनुचित आर्थिक लाभ का मामला बताया गया है।
चालू व गैर चालू हिस्से दर्शाए
याचिकाकर्ताओं की ओर से संबंधित सड़क मार्ग का एक व्यवस्थित रूट डायग्राम भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसमें मार्ग के चालू और गैर-चालू हिस्सों को अलग-अलग दर्शाया गया है। इसके माध्यम से अदालत के समक्ष यह स्थिति रखने का प्रयास किया गया कि जिस पूरे हिस्से के लिए टोल लिया जा रहा है, उसका कुछ आधारभूत ढांचा अभी पूरा नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनते हुए अब मामले को अब 16 नवंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
