शिमला-मटौर फोरलेन: खास तकनीक से बन रहा रियुंद पुल वर्षों तक रहेगा मजबूत, घटेगी 5 KM दूरी
मटौर-शिमला फोरलेन पर रियुंद खड्ड पुल के निर्माण में पहली बार अत्याधुनिक मेम्ब्रेन मैट तकनीक का उपयोग किया जा रहा ...और पढ़ें

रियुंद पुल पर बिछाई जा रही मेम्ब्रेन मैट। जागरण
HighLights
रियुंद खड्ड पुल पर मेम्ब्रेन मैट तकनीक का उपयोग।
यह तकनीक पुल की उम्र दशकों तक बढ़ाएगी।
कछियारी-रानीताल की दूरी 5 किलोमीटर कम होगी।
रितेश ग्रोवर, कांगड़ा। मटौर-शिमला फोरलेन पर कछियारी-भंगवार खंड में नवनिर्मित रियुंद खड्ड पुल को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पहली बार अत्याधुनिक मेम्ब्रेन मैट तकनीक का इस्तेमाल किया है। पुल पर कोलतार बिछाने से पहले वाटरप्रूफिंग के लिए इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। एक लेन पर मेम्ब्रेन मैट बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि दूसरी लेन में साफ-सफाई के बाद यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मेम्ब्रेन मैट का काम पूरा होने के बाद ही पुल पर कोलतार बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा।
यह अत्याधुनिक तकनीक पुल के कंक्रीट और स्टील ढांचे को पानी के रिसाव से बचाने के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। मेम्ब्रेन मैट को पुल के कंक्रीट स्लैब और डामर की परत के बीच बिछाया जाता है, इससे बारिश और बर्फ का पानी कंक्रीट के भीतर जाने के साथ स्टील गार्डर्स तक नहीं पहुंच सकेगा। पानी के रिसाव पर रोक लगने से पुल के अंदर लगी सरियों में जंग लगने की संभावना कम होगी और इससे पुल की मजबूती लंबे समय तक बनी रहेगी।
कई दशक तक बढ़ेगी पुल की उम्र
मेम्ब्रेन मैट तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पुल के कंक्रीट ढांचे में पानी के प्रवेश को रोका जा सकता है। पानी के कारण सरियों में जंग लगने से पुल की संरचना कमजोर होने की आशंका रहती है, लेकिन वाटरप्रूफिंग की यह परत इस खतरे को काफी हद तक कम करती है। इससे पुल की उम्र कई दशक तक बढ़ने की उम्मीद है।
गड्ढे पड़ने की संभावना भी होती है कम
इसके अलावा डामर की परत को भी नीचे से नमी मिलने की संभावना कम हो जाती है, जिससे भविष्य में सड़क के उखड़ने और गड्ढे बनने की समस्या भी कम हो सकती है।
एनएचएआइ के अनुसार अब निर्माणाधीन नए पुलों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। रियुंद खड्ड पुल पर भी इसी प्रक्रिया के तहत पहले मेम्ब्रेन मैट बिछाया जा रहा है और उसके बाद डामर की परत डाली जाएगी।
कछियारी से रानीताल की दूरी होगी पांच किलोमीटर कम
फोरलेन में निर्मित रियुंद खड्ड पुल कांगड़ा में कछियारी बाईपास को दौलतपुर सुरंग के माध्यम से रानीताल से जोड़ता है। पुल के पूरी तरह चालू होने के बाद कछियारी से रानीताल की दूरी करीब 20 किलोमीटर से 15 किलोमीटर रह जाएगी। इससे वाहन चालकों और यात्रियों को पांच किलोमीटर की दूरी कम तय करनी पड़ेगी और समय की भी बचत होगी।
62 मीटर ऊंचे पिलर पर दो बड़े स्टील स्पैन पर तैयार
यह पुल करीब 62 मीटर ऊंचे पिलर पर दो बड़े स्टील स्पैन की मदद से तैयार किया गया है। फोरलेन परियोजना के इस महत्वपूर्ण हिस्से के पूरा होने से कांगड़ा क्षेत्र में यातायात को भी बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
क्या कहते हैं अधिकारी
कछियारी-हमीरपुर फोरलेन परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएच राकेश यादव ने बताया कि मेम्ब्रेन मैट तकनीक का इस्तेमाल अब एनएचएआई के निर्माणाधीन नए पुलों पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से बारिश और बर्फ का पानी कंक्रीट व स्टील गार्डर्स तक नहीं पहुंच पाता, जिससे पुल की मजबूती बनी रहती है और उसकी उम्र कई दशक तक बढ़ाई जा सकती है।
यह है मेम्ब्रेन मैट तकनीक
एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक प्रणाली है। इसका मुख्य उद्देश्य पुल के कंक्रीट या स्टील के बेस को पानी, नमी और रसायनों के रिसाव से बचाना है। जब पुल के ऊपर डामर की सड़क बनाई जाती है, तो उसके नीचे इस विशेष वाटरप्रूफ मेम्ब्रेन या मैट को बिछाया जाता है।
