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हिमाचल में पंचायतें प्रति परिवार वसूलेंगी 1200 रुपये, परफार्मेंस ग्रांट पाने के लिए राजस्व बढ़ाने की शर्त लगाई

By Rajinder Dogra Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 17 Sep 2026 03:52 PM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 04:12 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में पंचायतों को 16वें वित्त आयोग की परफार्मेंस ग्रांट पाने के लिए अब अपने संसाधनों से आय बढ़ानी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में पंचायतें राजस्व बढ़ाने के लिए 1200 रुपये प्रति परिवार वसूल करेंगी। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश में पंचायतें राजस्व बढ़ाने के लिए 1200 रुपये प्रति परिवार वसूल करेंगी। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. 16वें वित्त आयोग की परफार्मेंस ग्रांट हेतु नए नियम।

  2. पंचायतों को प्रति परिवार ₹1200 राजस्व कमाना होगा।

  3. आय बढ़ाने पर जोर, नहीं तो ग्रांट रुक सकती है।

संवाद सहयोगी, जसवां परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायतों को मिलने वाली परफार्मेंस ग्रांट के लिए अब अपने संसाधनों से आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। वर्ष 2028-29 से परफार्मेंस ग्रांट प्राप्त करने के लिए पंचायतों को प्रति परिवार न्यूनतम 1200 रुपये सालाना अपना राजस्व अर्जित करना होगा। निर्धारित शर्त पूरी नहीं करने वाली पंचायतों को परफार्मेंस ग्रांट से वंचित होना पड़ सकता है।

16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार वर्ष 2027-28 में स्वस्रोत राजस्व में न्यूनतम 2.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। इसके बाद वर्ष 2028-29 से पंचायतों के लिए प्रति परिवार कम से कम 1200 रुपये वार्षिक स्वस्रोत राजस्व अर्जित करने का मानक लागू होगा। इसका उद्देश्य पंचायतों को अपने स्तर पर आय के साधन विकसित करने और केवल सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

आय मानक अनुरूप न हुई तो ग्रांट पर चलेगी कैंची

पंचायतों को कर एवं शुल्क सहित आय के विभिन्न स्वीकृत स्रोतों को मजबूत करना होगा। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के साथ ही राजस्व वसूली की व्यवस्था को प्रभावी बनाना भी आवश्यक होगा। जिन पंचायतों की अपने संसाधनों से आय निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं होगी, उन्हें परफार्मेंस ग्रांट प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।

प्रदर्शन और पात्रता मानकों से जोड़ी गई ग्रांट

16वें वित्त आयोग की अवधि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक है। आयोग की सिफारिशों के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों को मूल अनुदान के साथ परफार्मेंस ग्रांट का भी प्रावधान किया गया है। परफार्मेंस ग्रांट पंचायतों के निर्धारित प्रदर्शन और पात्रता मानकों से जोड़ी गई है। इसके लिए पंचायतों को वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ अपनी आय बढ़ाने की दिशा में भी काम करना होगा।

नई व्यवस्था से पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और उन्हें स्थानीय स्तर पर अधिक आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है। पंचायतों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे उपलब्ध राजस्व स्रोतों की पहचान करें और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करें। साथ ही राजस्व संग्रहण में पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित करनी होगी।

क्या कहना है निदेशक का

पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने बताया कि सोलहवें वित्त आयोग के तहत परफॉर्मेंस ग्रांट प्राप्त करने के लिए पंचायतों को निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और आय के वैध साधनों का बेहतर उपयोग करना होगा। उन्होंने बताया कि निर्धारित अवधि से पंचायतों के राजस्व में अपेक्षित वृद्धि तथा प्रति परिवार तय आय के मानक को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। यदि पंचायत की आमदनी कम है तो उसमें बढ़ोतरी करनी होगी अन्यथा पंचायतों की परफार्मेंस ग्रांट रुक सकती है।

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