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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

TTR Ropeway Incident : वेब सीरीज ने याद दिलाई 1992 की वह खतरनाक घटना, 48 घंटे हवा में अटकी रही थी 11 जिंदगियां, तस्वीरें देख आज भी कांप जाएगी रूह

By Virender KumarEdited By:
Published: Sun, 11 Sep 2022 04:41 PM (IST)Updated: Sun, 11 Sep 2022 05:03 PM (IST)

TTR Ropeway Incident 1992 Web Series 11 अक्टूबर 1992 को जब 12 लोगों की सांसें हवा में अटक गई थीं। ...और पढ़ें

TTR Ropeway Incident : टीटीआर रोपवे में अटके लोगों के रेस्‍क्‍यू आपरेशन में जुटे जवान। (तत्‍कालीन)
TTR Ropeway Incident : टीटीआर रोपवे में अटके लोगों के रेस्‍क्‍यू आपरेशन में जुटे जवान। (तत्‍कालीन)

सोलन, मनमोहन वशिष्ठ।

TTR Ropeway Incident 1992 Web Series, जिंदगी के सफर में कभी-कभी कुछ घटनाएं ऐसी घट जाती हैं जिन्हें भुला पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक घटना घटी थी हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला की कसौली तहसील के अंतर्गत परवाणू में 11 अक्टूबर, 1992 को, जब 11 (अटेंडेंट के बिना) लोगों की सांसें रोपवे की रस्‍सी टूटने से हवा में अटक गई थीं। टिंबर ट्रेल रिजोर्ट (टीटीआर) में चलने वाली रोपवे ट्राली में तीन दिन तक लोग फंसे रहे थे। यह घटना दिखाई जाएगी OTT Platform पर Disney+ Hoststar में India's Incredible Rescue Ops की सीरीज में। इसमें बताया गया है कि कैसे 1500 फीट की ऊंचाई पर फंसे पर्यटकों को थल सेना व भारतीय वायु सेना के जवानों ने बचाया था।

आज भी सिहर उठते हैं लोग

तीन दिन तक 11 लोगों की सांसें हवा में अटकी रहीं व एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी। उस समय थल सेना व वायु सेना के जवानों ने 1500 फीट की ऊंचाई पर फंसे लोगों की जान बचाने के लिए रेस्क्यू आपरेशन को अंजाम दिया था। टिंबर ट्रेल रोपवे, जिसमें बैठकर व्यक्ति 2000 से 5000 फीट ऊपर पहुंच जाता है, में ट्राली फंसने की सूचना चारों तरफ फैल गई थी। इसमें फंसे पर्यटक दिल्ली व पंजाब के थे। टीटीआर रिसोर्ट परवाणू में लोगों का जमावड़ा लग गया था, लेकिन कोई भी कुछ नहीं कर पा रहे थे। आज भी लोग जब उस हादसे को याद करते हैं तो सिहर उठते हैं।

रेस्‍क्‍यू आपरेशन खत्‍म होने के बाद थल सेना, वायु सेना व बचाए पर्यटकों के साथ तत्‍कालीन मंत्री महेंद्र नाथ सोफत। (मध्‍य)

ट्राली अटेंडेंट की हुई थी मौत

कालका-शिमला नेशनल हाइवे पर स्थित परवाणू के समीप बने टिंबर ट्रेल रिजोर्ट में चलने वाली रोपवे ट्राली झटके के साथ अचानक रुक गई। अंदर बैठे लोगों समेत ही ट्राली तार पर पेंडुलम की तरह हिचकोले खाने लगी। काफी समय के बाद भी ट्राली न आगे बढ़ी व ही पीछे हट पाई। अंदर बैठे पर्यटकों में भी इससे खलबली मच गई थी। ट्राली में अटेंडेंट समेत 12 जानें खतरे में थीं, जिनमें एक छोटा बच्चा शामिल था। इसी दौरान ट्राली अटेंडेंट ने जान बचाने के लिए छलांग लगा दी थी, जिस कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। दरवाजा बंद होने से पहले ही एक व्यक्ति भी गिरने से घायल हो गया था।

रेस्क्यू के लिए बुलाई थी सेना

10 अक्टूबर शाम छह बजे कसौली में सेना को इसकी जानकारी दी गई। वहां से वेस्टर्न कमांड चंडीमंदिर से सेना को सहायता के लिए बुलाया गया। हेलीकाप्टर के माध्यम से ट्राली तक पहुंचने के काफी प्रयास किए गए। घटना के एक दिन बाद भी यात्रियों को बाहर निकालने में सफलता नहीं मिली तो विशेष कमांडो दस्ते को बुलाया गया। 13 अक्टूबर को इस दस्ते के मेजर क्रेस्टो अपने हेलीकाप्टर के साथ ठीक ट्राली के ऊपर पहुंचे और एक रस्सी की सहायता से उतरे। एक-एक करके सभी को रस्सी की सहायता से हेलीकाप्टर तक पहुंचाकर वहां से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

सम्मानित किए थे जांबाज

बचाव अभियान में शामिल तत्कालीन मेजर इवान जोसेफ क्रेस्टो, ग्रुप कैप्टन फली होमी, विंग कमांडर सुभाष चंद्र, फ्लाइट लेफ्टिनेंट पी उपाध्याय को सम्मानित भी किया गया था। मेजर इवान जोसेफ क्रेस्टो को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।