जागरण संवाददाता, धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला परिसर में आत्मनिर्भर भारत में शोधार्थियों का योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), रिर्सच स्कोलर्स समिति की ओर से आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सतप्रकाश बंसल ने शिरकत की।

प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कहा कि विवि को शोध कार्यों में अग्रणी विवि बनाना है। बीते वर्ष कोविड के कारण शोध कार्य काफी प्रभावित हुए हैं। इस समय ने बहुत कुछ सीखाया है। हालांकि इस अवधि को कैसे उपलब्धि में बदला जाए, इस पर प्रयास करना होगा। जब आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना करते हैं तो तीन आयाम हमारे समक्ष होते हैं शिक्षा, भाषा और शोध। यह सभी एक-दूसरे के पूरक हैं, पृथक नहीं हैं। शोधार्थियों का योगदान देश और समाज के लिए होना चाहिए। शोध में इस तरह के विषय लिए जाएं जो समाज के लिए लाभदायक हों, देश के लिए लाभदायक हों। तभी वो शोध कार्य सफल है। शोध कार्यों की उपयोगिता होनी चाहिए। नया सोंचेंगे तभी सोच सफल होगी। शोध हिदी में हो या अंग्रेजी भाषा में, उसकी उपयोगिता उसकी सफलता होगी।

वहीं चिन्मय फाउंडेशन के चीफ आपरेटिग आफिसर नरेंद्र पाल, आयुष ह‌र्ब्स प्राइवेट लिमिटेड के चीफ आपरेटिग आफिसर जितेंद्र सोढी भी मौजूद रहे।

नरेंद्र पाल ने शोधार्थियों को फाउंडेशन के क्रियाक्लापों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब होता है कि हम समाज में योगदान किस तरह से दे सकते हैं। किस पर शोध कर रहे हैं और समाज में उस शोध कार्य का क्या योगदान रहेगा। जितेंद्र सोढी ने बताया कि किस तरह से उन्होंने आयुर्वेद के माध्यम से भारत को विदेश में पहचान दिलवाई।

इस मौके पर समिति के सह संयोजक दीपक शर्मा, अली जान सिंह, प्रेमी, प्रकाश चौहान, विवि के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रदीप कुमार, प्रशांत कश्यप, नवनीत कौशल, पंकज व अन्य मौजूद रहे।

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