शिखा वर्मा, शिमला। प्रदेश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना की पहली व दूसरी लहर के दौरान आक्सीजन की कमी हुई थी। सरकार ने इससे निपटने के लिए अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट तो स्थापित कर दिए, लेकिन अब तक तकनीशियन की नियुक्ति नहीं की है। कुछ अस्पतालों ने एक-एक तकनीशियन नियुक्त किया है, जबकि कुछ ने पुराने स्टाफ को प्रशिक्षण दिया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह वैकल्पिक व्यवस्था है। सरकार जब स्वीकृति देगी तो सभी तकनीशियन के पद भर दिए जाएंगे।

शिमला जिले के अस्पतालों में छह आक्सीजन प्लांट स्थापित किए हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल (आइजीएमसी) शिमला में आक्सीजन प्लांट निजी हाथों में सौंपा गया है। इसकी पूरी व्यवस्था कंपनी करती है। इसके अलावा दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला (रिपन) में दो, कमला नेहरू अस्पताल, खनेरी व रोहडू अस्पताल में भी आक्सीजन प्लांट स्थापित किए हैं। 24 घंटे के लिए प्रत्येक आक्सीजन प्लांट में कम से कम तीन तकनीशियन की जरूरत है। यहां पर शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है।

पहले भी अस्पतालों में हुई थी आक्सीजन की कमी

कोरोना की पहली लहर के दौरान अस्पतालों में जो मरीज दाखिल हुए थे, उन्हें आक्सीजन की कमी हुई थी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को आक्सीजन कंसंट्रेटर भेजे थे। सरकार ने अस्पतालों में ही आक्सीजन प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया, लेकिन इनके संचालन व व्यवस्था देखने के लिए तकनीशियन की नियुक्ति नहीं की गई।

अस्पताल में दो आक्सीजन प्लांट हैं। अब तक तकनीशियन की नियुक्ति नहीं की गई है। एक ही तकनीशियन आक्सीजन प्लांट को आपरेट कर रहा है। स्टाफ के कुछ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार को प्रस्ताव भेजकर तकनीशियन की नियुक्ति करने की स्वीकृति मांगी गई है।

-डा. लोकेंद्र शर्मा, एमएस, दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला।

अस्पताल में एक आक्सीजन प्लांट है और इसमें तीन तकनीशियन हैं। एक तकनीशियन नियुक्त किया है और दो स्टाफ के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया है।

-डा. जितेंद्र मोक्टा, एमएस, कमला नेहरू अस्पताल।

Edited By: Neeraj Kumar Azad