विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ऑनलाइन शॉपिंग से डाडासीबा के बाजार पड़े सूने, छोटे व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट

Published: Mon, 12 Oct 2026 08:53 AM (GMT+05:30)

आनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन से डाडासीबा के स्थानीय बाजार सूने पड़ गए हैं, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारी चिंतित ...और पढ़ें

आनलाइन खरीदारी से सूने पड़े बाजार।

आनलाइन खरीदारी से सूने पड़े बाजार।

HighLights

  1. आनलाइन खरीदारी से स्थानीय बाजार की रौनक हुई कम।

  2. छोटे व्यापारी आर्थिक संकट और बिक्री में कमी से जूझ रहे।

  3. स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने की अपील, 'वोकल फॉर लोकल'।

संवाद सूत्र, डाडासीबा। डिजिटल दौर में आनलाइन खरीदारी का बढ़ता चलन स्थानीय बाजार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र के डाडासीबा और आसपास के बाजार में पहले जैसी चहल-पहल नहीं दिख रही। लोग मोबाइल फोन से घर बैठे सामान मंगाना सुविधाजनक मानते हैं, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

दुकानदारों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में ग्राहकों की संख्या लगातार घटी है। बिक्री कम होने से रोजमर्रा का व्यापार प्रभावित है और दुकानों का खर्च निकालना भी चुनौती बनता जा रहा है।

ऑनलाइन शॉपिंग ने व्यापारियों की बढ़ाई चिंता

उनका कहना है कि स्थानीय बाजार में ग्राहक सामान देखकर उसकी गुणवत्ता जांच सकता है, मोलभाव कर सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे बदलवा सकता है। आनलाइन खरीदारी में गलत या खराब सामान, डिलीवरी में देरी और साइबर ठगी की शिकायतें भी सामने आती हैं।

बाजार में शॉपिंग करना ऑनलाइन से बेहतर

डाडासीबा के दुकानदार सुनील शर्मा ने कहा कि स्थानीय बाजार में ग्राहक अपनी पसंद का सामान चुन सकता है और जरूरत पड़ने पर बदलवा भी सकता है। स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना सबकी जिम्मेदारी है।

व्यापार मंडल डाडासीबा के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गोगा के अनुसार आनलाइन खरीदारी से छोटे व्यापारियों पर आर्थिक संकट बढ़ रहा है। सुरक्षित और भरोसेमंद खरीदारी के लिए स्थानीय बाजार को प्राथमिकता देना जरूरी है।

दुकानदार अजय सोनी ने कहा कि स्थानीय दुकानों से खरीदारी करने पर व्यापार और रोजगार को सहारा मिलेगा तथा बाजार की रौनक लौटेगी। बाबा भरथरी सांस्कृतिक मंच कमेटी डाडासीबा के प्रधान रितेश शर्मा ने स्थानीय दुकानों के भरोसे, गुणवत्ता और तत्काल सेवा को बेहतर बताया। उनके अनुसार, दुकानदार खरीदे गए सामान की जिम्मेदारी भी निभाता है।

एसएमसी डाडासीबा स्कूल के उपप्रधान मोहित शर्मा ने कहा कि दुकानों पर सामान तुरंत और कई बार आनलाइन से बेहतर कीमत पर मिल जाता है। समाजसेवी सोहन लाल मेहरा के अनुसार, स्थानीय खरीदारी से व्यापारियों और परिवारों की आजीविका सुरक्षित रहती है। ‘वोकल फार लोकल’ अपनाकर स्थानीय व्यापार मजबूत करना समाज के हित में है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल प्रदेश में SMC और कंप्यूटर शिक्षकों के लिए भर्ती का रास्ता खुला, 4800 पदों पर होगी नियुक्ति