शिमला,अनिल ठाकुर। सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा के दावे हवा साबित हो रहे हैं। प्रदेश के 1991 प्राइमरी और 66 मिडिल स्कूल एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। आठ प्राइमरी और एक मिडिल स्कूल ऐसा है, जहां पर एक भी शिक्षक नहीं है। एसएमसी के माध्यम से यहां अस्थायी शिक्षक तैनात किया गया है। यू डाइस-2020-21 (यूनिफाइड डिस्ट्रिक इनफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन) की रिपोर्ट में इसका पता चला है।

प्राइमरी स्कूलों में सबसे ज्यादा हालत खराब है। रिपोर्ट के अनुसार 6479 प्राइमरी और 378 मिडिल स्कूलों में दो-दो शिक्षक हैं। इसी तरह 1573 प्राइमरी और 746 मिडिल स्कूलों में तीन-तीन शिक्षक ही नियुक्त हैं। 459 प्राइमरी स्कूलों में चार से छह शिक्षक हैं। रिपोर्ट के अनुसार 26 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं, जहां पर सात से 10 शिक्षक हैं, जबकि दो स्कूल ऐसे हैं जहां पर 11 से 15 प्राइमरी शिक्षक कार्यरत हैं। दो माध्यमिक स्कूलों और एक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में भी सिर्फ एक-एक शिक्षक सेवा दे रहा है। एसएसए की ओर से यह रिपोर्ट तैयार करवाई गई है। इसे प्रदेश सरकार को भेज दिया गया है।

मंडी, कांगड़ा, सिरमौर, शिमला के प्राइमरी स्कूलों में हालत खराब

रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा 371 स्कूल कांगड़ा जिला के हैं, जो एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। इसी तरह मंडी में 361, शिमला के 250, सिरमौर में 215, बिलासपुर में 136, चंबा में 189, हमीरपुर में 103, किन्नौर में 12, कुल्लू 109, लाहुल स्पीति 18, सोलन 148 और ऊना में 79 स्कूलों में एक-एक शिक्षक है। प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों को पढ़ाने के साथ मिड-डे मील, रूटीन डाक सहित अन्य गैर शैक्षणिक कार्य भी करने पड़ते हैं। शिक्षकों को समस्या यह आ रही है कि वह पांच कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाएं या फिर अन्य काम करें।

जेबीटी भर्ती न होने से दिक्कत

काफी समय से जेबीटी भर्ती रुकी हुई है। शिक्षा विभाग में दो साल में केवल 1464 जेबीटी ही भर्ती हुए हैं। भर्ती का यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इसमें देरी हो रही है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार टीजीटी के 4895 और सीएंडवी के 2279 पद भरकर रिकार्ड भर्तियां की गई हैं।

Edited By: Neeraj Kumar Azad