धर्मशाला, जागरण संवाददाता। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में दस्तावेजों की जांच से पूर्व ही नौकरी छोड़कर जाने वाले दो शिक्षकों के मामले में एनएसयूआइ के प्रदेश अध्यक्ष छतर ठाकुर और एनएसयूआइ क्षेत्रीय केंद्र सदस्य वीर सिंह ने एक बार फिर केंद्रीय विश्वविद्यालय में अयोग्य लोगों की नौकरियां देने के आरोप लगाया है।

वीर सिंह ने कहा कि यदि यदि केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यदि योग्य लोगो को नियुक्त किया गया है। एक ओर सीयू प्रशासन तर्क दे रहा है कोई भी अपात्र शिक्षक भर्ती नहीं हुआ है और शिक्षकों की तैनाती पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है। अगर इतनी ही पारर्शिता अपनाई गई थी तो जांच के डर से हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) दो प्रोफ़ेसर ने जांच से पूर्व ही अपने पदों से इस्तीफे क्यों दे दिए, ताकि वह सीयू के जांच रिकार्ड में न आएं। केंद्रीय विश्वविद्यालय में 2015 से 2019 के बीच हुई प्राध्यापकों की भर्ती पर एनएसयूआइ ने सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी।

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राध्यापकों के डिग्री व दस्तावेजों की जांच शुरू की। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष छतर सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार आने के बाद केन्द्रीय विश्विद्यालय के सभी अधिकारियों के दस्तावेजों के जांच की जाएगी और अयोग्य लोगो को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। सीयू के दो प्राेफेसरों ने अपने पद से इस्तीफे दे दिए हैं। नौकरी छोड़ने वाले प्रोफेसरों में भाषा स्कूल के हिंदी विभाग के प्रमुख एवं एसोसिएट प्राेफेसर हैं। यह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। जबकि दूसरे स्कूल ऑफ सोशल साइंस के असिस्टेंट प्राेफेसर हैं, जोकि मूल रूप से पंजाब के निवासी हैं। इन दोनों प्रोफेसरों की नियुक्तियां 2018-19 में हुई हैं। हालांकि सीयू प्रशासन इस मामले यह कह रहा है कि जिन भी प्रोफेसरों ने नौकरी छोड़ी है, उन्होंने अपने निजी फैसले के चलते पद से इस्तीफे दिए हैं और अभी तक की जांच में किसी भी शिक्षक की दस्तावेज व डिग्रियां गलत नहीं पाई गई हैं। लेकिन असल बात यह है कि इन शिक्षकों को पहले से ही पता था कि उनके दस्तावेजों की जांच विभाग तक पहुंची तो उन पर कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है। इसी के चलते उन्होंने पहले ही अपने पदों से इस्तीफे दे दिए हैं।

इसी वर्ष जून माह में सीयू के छात्र संगठन एनएसयूआइ ने शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। इसको लेकर एनएसयूआइ ने तत्कालीन कार्यकारी कुलसचिव को दो बार ज्ञापन भी सौंपे थे। ज्ञापन में उन्होंने तत्कालीन कुलपति डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री पर नियमों की दरकिनार करते हुए अपात्र लोगों को सीयू के नौकरी देने के आरोप लगाए थे। छात्र संगठन की मांग के बाद सीयू प्रशासन ने प्रोफेसरों के दस्तावेजों की जांच शुरू की थी।

Edited By: Richa Rana