राजगढ़, संवाद सूत्र। राजगढ़ उपमंडल के कंडानाला में पाइप लाईन टूटने के कारण बीते पांच दिनों से राजगढ़ शहर में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। जिसके चलते शहर में पानी के लिए लोगों में त्राहि त्राहि मची हुई है। शहर को जलापूर्ति करने वाली कंडानाला पेयजल योजना जंग लगने से आए दिन जगह जगह पर टूट रही है। विभाग के अधिकारी व कर्मचारी गहरी नींद में सोये रहते है । जिस कारण लोग पानी समस्या से जूझ रहे हैं । सबसे अहम बात यह है कि राजगढ़ शहर में पानी उपलब्ध करवाने के लिए जल शक्ति विभाग के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2005 के दौरान राजगढ़ शहर के लिए कंडानाला पेयजल योजना तैयार की गई थी। उस दौरान शहर की आबादी केवल अढाई हजार हुआ करती थी, जोकि वर्तमान में बढ़कर छः हजार से ज्यादा हो चुकी है।

वर्तमान में कंडानाला पेयजल शहर में मानको के आधार पर पेयजल उपलब्ध करवाने में नाकाफी साबित हो रही है । शहर के नागरिकों का यह भी आरोप है कि पानी का आबंटन सही तरीके से नहीं हो पाता है। जिसका मुख्य कारण विभाग के कीमेन अथवा फीटरो का बीते कई वर्षों से एक ही लाईन पर काम करना बताया जा रहा है ।विभाग के पास जो कर्मचारी पानी वितरित करते है। वह शहर लोगो के साथ भेदभाव करके पानी बांटते है। जहा जायदा जान पहचान है, वहा पर पानी जायदा देते है और जहा जान पहचान नही हैं, वहा पानी कम देते है। गोरतलब हो की राजगढ़ शहर की पेयजल समस्या के स्थाई समाधान के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में छ‘ करोड़ की पैरवी खडड उठाऊ पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी । जोकि वन विभाग से एफसीए की स्वीकृति न मिलने के कारण बीते छः वर्षों से अधर में लटकी है । इस योजना की आधारशिला वर्ष 2015 के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा रखी गई थी। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनने पर यह योजना खटाई में पड़ गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार करीब छः वर्ष पूर्व एफसीए का केस तैयार करके सरकार को भेजा गया है परंतु आजतक एफसीए की मंजूरी नहीं मिल पाई है।

 यही नहीं पच्छाद के उपचुनाव के दौरान राजगढ़ में जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा था कि राजगढ़ शहर के लिए जल जीवन मिशन के तहत 25 करोड़ की योजना तैयार की गई है, जिसमें राजगढ़ शहर के अतिरिक्त साथ लगती 13 पंचायतें शामिल की गई है ।शहरवासियो का विभाग पर आरोप लगाया है की विभाग के आधिकारी समय रहते अपने काम पर ध्यान नहीं देते जिस कारन शहर में पानी की समस्या बनी रहती है। विभाग के बड़े अधिकारी व कर्मचारी अपनी डियूटी को सही तरीके से नहीं करते। यदि विभागीय अधिकारी व् कर्मचारी समय रहते सही काम करे तो समस्या आ ही नहीं सकती है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार 25 करोड़ की यह योजना भी फाईलों में दफन हो चुकी है। सहायक अभियंता जेएसवी राजगढ़ बीके कौंडल ने बताया कि बारिश के कारण कंडानाला में पाईपें टूट गई थी, जिनकी मुरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। शीघ्र ही शहर में जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी। कंडानाला पेयजल योजना की जंग लगी पाईपों को चरणबद्ध तरीक से बदला जा रहा है। इसके अतिरिक्त पैरवी खडड उठाऊ पेयजल योजना की अभी तक एफसीए स्वीकृति नहीं मिली है।

Edited By: Richa Rana