योल, सुरेश कौशल। श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम मंदिर उत्तरी भारत का एक सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल ही नहीं एक प्रख्यात सिद्धपीठ भी है। यहां कई महात्माओं ने सिद्धिदात्री प्राप्त कर जनमानस का कल्याणार्थ कार्य किए हैं। यहां हर साल देश‌ से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु मां के दर्शनार्थ आते हैं। हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा भी मां के चरणों में अर्पित होता‌ है। परंतु जिस मां के दर लोगों की इतनी आस्था है वहा नियमित पुजारी नहीं होना हमेशा श्रद्धालुओं को खलता है।

पिछले दो साल से जुगाड़ के पुजारियों से मंदिर का कार्य जैसे तैसे चल रहा है। दिलचस्प बात ये है कि मंदिर में जव भी कोई कर्मी या पुजारी सेवानिवृत्त होता है तो उनकी फिर से सेवा विस्तार कर मंदिर में विठाया जा रहा है। यह कर्म पिछले कई सालों से चला आ रहा है। प्रशासन मंजूरी मिलने के इंतजार की दुहाई दे कर इतिश्री कर लेता है। जहां तक मंदिर की पूजा अर्चना तथा धार्मिक अनुष्ठानों का प्रश्न‌ है कर्मकांडी विद्वान‌ ही कर सकता है ,ऐसी हमारी सनातन धर्म की परिपाटी है।

श्री चामुंडा मंदिर में मौजूदा स्थिति यह है कि पिछले दिनों हिमानी चामुंड़ा मंदिर के एक पुजारी को नियमित करने चामुंड़ा मंदिर में तैनात किया गया। परंतु अब उसे फिर हिमानी चामुण्डा भेज दिया गया, क्योंकि यहां पिछले दो साल मंदिर की पूजा अर्चना का कार्य सेवानिवृत्त पुजारी ही संभाल रहा है, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में पुजारियों के लिए जुगाड का सबसे सहारा लेना पड़ता है। प्रशासन को‌ इस सम्बन्ध में उचित कदम उठाने चाहिए। उधर एसडीएम धर्मशाला एवं सहायक मंदिर आयुक्त शिल्पी वैक्टा ने बताया कि नियमित पुजारी को फिर हिमानी चामुण्डा तैनात करने के लिए मंदिर न्यास बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया है ‌‌‌‌‌। जहां तक नियमित पुजारी की तैनाती का प्रश्न है सक्ष्म प्राधिकारी की मंजूरी का इंतजार है।

Edited By: Richa Rana