जब चिरप्रतिद्वंदी नेता के साथ मंच पर आए मनकोटिया, 5 बार हुए आमने-सामने; अब निधन पर सरवीण ने शेयर की चर्चित फोटो
हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर उनकी चिरप्रतिद्वंदी रहीं सरवीण चौधरी ने दुख जताया ...और पढ़ें

2022 के चुनाव के दौरान मेजर विजय सिंह मनकोटिया से मिलने पहुंची सरवीण चौधरी। फाइल फोटो
HighLights
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन, हिमाचल में शोक की लहर।
चिर प्रतिद्वंदी सरवीण चौधरी ने दुख जताते हुए फोटो साझा की।
दोनों नेताओं ने पांच बार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
जागरण टीम, धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर 2022 से पहले तक उनकी चिरप्रतिद्वंदी रही सरवीण चौधरी ने भी दुख जताया है। दोनों नेताओं ने 5 बार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा। हालांकि 2022 के चुनाव के दौरान मेजर मनकोटिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे व दोनों एक नेता एक मंच पर चुनाव प्रचार करते भी दिखे थे। मनकोटिया ने अंतिम चुनाव में सरवीण के लिए वोट मांगे थे।
लेकिन इससे पहले पूरे राजनीतिक करियर में मेजर मनकोटिया और सरवीण चौधरी चिर प्रतिद्वंदी रहे। 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान मेजर मनकोटिया के भाजपा में शामिल होने पर सरवीण चौधरी उनके तियारा स्थित निवास पर मिलने पहुंची थीं, सरवीण ने वही फोटो शेयर कर उनके निधन पर दुख जताया है।
सरवीण ने लिखा संदेश
सरवीण चौधरी ने मनकोटिया के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने लिखा कि शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक एवं पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन अत्यंत दुःखद है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
दोनों नेता कब-कब हुए आमने-सामने
- 1993 में पहली बार सरवीण चौधरी ने मेजर विजय सिंह मनकोटिया के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जिसमें मनकोटिया ने जीत दर्ज की थी।
- 1998 में मेजर मनकोटिया को सरवीण के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।
- 2003 में मेजर मनकोटिया ने एक बार फिर जीत दर्ज की थी।
- 2007 में मनकोटिया ने धर्मशाला से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
- 2012 में मनकोटिया ने कांग्रेस के टिकट पर शाहपुर से चुनाव लड़ा, जहां भाजपा की सरवीण चौधरी जीत गईं।
- 2017 में केवल सिंह पठानिया को कांग्रेस टिकट मिलने पर मनकोटिया ने निर्दलीय चुनाव लड़ा व फिर से सरवीण मौका मार गईं।
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