हिमाचल के मंदिरों में भीड़ व भगदड़ से निपटने के कैसे हैं प्रबंध? अष्टमी पर ज्वालामुखी में बुलाई अतिरिक्त पुलिस
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

श्रीचामुंडा माता मंदिर में मेटल डिटेक्टर से होकर प्रवेश करते श्रद्धालु।
HighLights
पुलिस, होमगार्ड और सीसीटीवी कैमरों से मंदिरों में कड़ी सुरक्षा।
भीड़ प्रबंधन हेतु अलग प्रवेश-निकास द्वार, बैरिकेडिंग की व्यवस्था।
ज्वालामुखी मंदिर में अष्टमी पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
जागरण टीम, कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में जिला कांगड़ा के प्रसिद्ध शक्तिधामों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। भगदड़ जैसे हालात न बनें, इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस, होमगार्ड और सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा रही है। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे हैं।
श्रीचामुंडा मंदिर में 28 कैमरों से हर हरकत पर नजर
श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम में 30 होमगार्ड और 45 पुलिस कर्मी तैनात हैं। मंदिर परिसर में लगे 28 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। नवरात्र और सावन अष्टमी मेलों के दौरान यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भीड़ अधिक होने पर बैरिकेडिंग की जाती है और सुरक्षा कर्मियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाता है।
मंदिर अधिकारी राकेश चौधरी ने बताया कि मंदिर परिसर में पर्याप्त खुला स्थान है और व्यवस्थाओं के जरिए श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित रखी जाती है। गर्भगृह में प्रवेश और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग द्वार हैं। मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही प्रवेश मिलता है। भीड़ बढ़ने पर बड़े हाल में श्रद्धालुओं को रोककर बारी-बारी से दर्शन के लिए भेजा जाता है।
लाउडस्पीकर से निर्देश
अफवाहों से भगदड़ जैसी स्थिति न बने, इसके लिए परिसर में लगे लाउडस्पीकर से निर्देश दिए जाते हैं। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए मुख्य प्रवेश द्वार से वाहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि उन्हें अधिक पैदल न चलना पड़े।
ज्वालामुखी में प्रवेश व निकासी मार्ग अलग-अलग
ज्वालामुखी माता मंदिर में एक प्रवेश और निकासी मार्ग है, लेकिन वहां जगह खुली है। क्षेत्र को सात सेक्टरों में बांटकर हर सेक्टर की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ अधिकारी को दी गई है। मंदिर में 70 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और सुरक्षा के लिए 100 होमगार्ड व पुलिस जवान तैनात हैं।
अष्टमी पर एक रिजर्व बुलाई
अष्टमी पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण एक रिजर्व दल अलग से बुलाना पड़ा। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में पूजा-अर्चना की। मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने बताया कि सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यहां भगदड़ की आशंका नहीं है।
बज्रेश्वरी देवी में भी बेहतर प्रबंध
बज्रेश्वरी माता मंदिर में 20 सुरक्षा जवान तैनात हैं और प्रवेश एक ही द्वार से होता है। भीड़ बढ़ने पर परिसर में कतारें लगाई जाती हैं, जो कई बार मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंच जाती हैं। मंदिर में 20 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। मुख्य सड़क से मंदिर तक की गलियां तंग हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रवेश मार्ग के ऊपर कैनोपी लगाई गई है। मंदिर अधिकारी प्रकाश चंद ने बताया कि नवरात्र के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और श्रद्धालुओं को सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
