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फोरलेन ने बदली कांगड़ा के हजारों लोगों की जिंदगी, कभी तरसते थे सड़क सुविधा के लिए आज हाईवे से जुड़े

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 13 Sep 2026 01:22 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में फोरलेन निर्माण से तरसूह, स्कोट और पलवाना जैसे क्षेत्रों की तस्वीर बदल गई है, जहाँ कभी लोग सड़क सुविधा के लिए तरसते थे।

कांगड़ा में फोरलेन से तरसूह पंचायत के लिए जाता रास्ता। जागरण

कांगड़ा में फोरलेन से तरसूह पंचायत के लिए जाता रास्ता। जागरण

HighLights

  1. कांगड़ा में फोरलेन ने तरसूह, स्कोट, पलवाना की जिंदगी बदली।

  2. क्षेत्र में आर्थिक, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ीं, विकास की नई राह खुली।

  3. पहले सड़क सुविधा के अभाव में पलायन और संघर्ष करते थे लोग।

रितेश ग्रोवर, कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में कभी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष करने वाले तरसूह, स्कोट, पलवाना और समेला पंचायत क्षेत्रों के लोगों ने शायद कभी नहीं सोचा था कि फोरलेन उनकी जिंदगी बदल देगा। कभी हर चुनाव में सड़क निर्माण मुख्य मुद्दा रहता था और हजारों लोग सड़क की मांग को लेकर प्रदर्शन करते थे, लेकिन अब फोरलेन के कारण इन क्षेत्रों में आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं।

लगभग आठ साल पहले तक इन पंचायतों में फोरलेन निर्माण को लेकर कोई खास हलचल या घोषणा नहीं थी। उस समय तरसूह और पलवाना में सड़क सुविधा बेहद खराब थी। स्वास्थ्य आपातकाल में एंबुलेंस की सुविधा लगभग न के बराबर थी और मरीजों को पालकी या कुर्सी पर कई किलोमीटर तक मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता था। 

स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और बुजुर्गों को उबड़-खाबड़ व पथरीले रास्तों से पैदल मुख्य हाईवे या बस स्टाप तक पहुंचना पड़ता था। किसानों को नकदी फसलें और दूध समय पर मंडियों तक पहुंचाने में दिक्कत होती थी। 

कांगड़ा पहुंचने के लिए करना पड़ता था अतिरिक्त सफर

करीब 20 वर्ष पहले नगरोट बगवां के लिली से सड़क सुविधा शुरू हुई, लेकिन कांगड़ा पहुंचने के लिए लोगों को करीब 30 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता था। 

कई लोगों ने पलायन किया

मानसून में कच्चे रास्ते कीचड़ में बदल जाते और छोटे नदी-नालों पर पुल न होने से संपर्क कट जाता था। निर्माण सामग्री पहुंचाना महंगा होने के कारण कई लोगों ने पलायन किया, जबकि सड़क सुविधा न होने से कई लोगों के रिश्ते तक नहीं हो पाए। तरसूह तक कुछ वर्ष पहले सड़क पहुंची, जबकि पलवाना को आजादी के बाद पिछले वर्ष ही सड़क सुविधा मिली।

शिमला-कांगड़ा फोरलेन ने क्षेत्र की तस्वीर बदली

अब शिमला-कांगड़ा फोरलेन परियोजना के शुरू होने से इन क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है। तरसूह और पलवाना के बीच पेट्रोल पंप का निर्माण शुरू होने जा रहा है, जबकि कई अन्य औद्योगिक प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं या शुरू होने वाले हैं। आने वाले समय में यह क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। 

जिंदगी बदल गई : उपप्रधान

तरसूह पंचायत के उपप्रधान अश्वनी कुमार ने कहा कि फोरलेन से कांगड़ा के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल तरसूह, स्कोट और पलवाना के लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। कभी लोग सड़क के लिए संघर्ष करते थे, लेकिन अब सुविधाएं क्षेत्र तक पहुंच रही हैं। वहीं पैदल रास्ते कटने के बाद लोग फुटओवर ब्रिज और सुरक्षित क्रासिंग की मांग भी उठा रहे हैं, ताकि नए संपर्क मार्ग के साथ आवागमन पूरी तरह सुरक्षित हो सके।

पांच करोड़ रुपये से तैयार पुल बना शोपीस

स्कोट-तरसूह सड़क मार्ग का मुद्दा करीब एक दशक तक हर चुनाव में प्रमुख रहा। पूर्व मंत्री चौधरी विद्यासागर ने अंतिम कार्यकाल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से इस पुल का शिलान्यास करवाया था। सरकार बदलने के बाद काम आगे नहीं बढ़ा। 2010 में पुल का निर्माण पूरा हुआ, लेकिन रेलवे ने सड़क निर्माण की अनुमति नहीं दी जो आज तक नहीं मिल पाई है। करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पुल सड़क से नहीं जुड़ पाया और अब यह महज शोपीस बनकर रह गया है।

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