यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शिमला की कच्चीघाटी भवन निर्माण के लिए पूरी तरह से असुरक्षित, तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट में सामने आए तथ्य
Shimla Kachighati Unsafe Building राजधानी शिमला के उपनगर कच्चीघाटी में भवन निर्माण पर रोक लग सकती है। कच्चीघाटी में भवन ...और पढ़ें

शिमला, जागरण संवाददाता। Shimla Kachighati Unsafe Building, राजधानी शिमला के उपनगर कच्चीघाटी में भवन निर्माण पर रोक लग सकती है। कच्चीघाटी में भवन गिरने के बाद बनाई गई तकनीकी कमेटी ने इसे भवन निर्माण के लिए पूरी तरह से असुरक्षित पाया है। इस रिपोर्ट में साफ है कि जो भवन गिरने की कगार पर हैं उन्हें बचाने का काम भवन मालिक अपने जोखिम पर कर सकते हैं। यदि बचाने की संभावना है तो ही ये अनुमति दी जाएगी। भवनों के छज्जों पर बनाई गई दीवारों को भी गिराना होगा। इसके साथ ही भवनों के नींव मजबूत करने के भवन मालिक को ही अपने जोखिम पर ये काम करवाना होगा।
कमेटी की ओर से 12 पन्ने की बनाई गई रिपोर्ट में ये साफ है कि इन असुरक्षित भवनों को तब तक खाली रखा जाएगा जब तक इन्हें रहने लायक सुरक्षित नहीं बनाया जाता। विशेषज्ञों की रिपोर्ट को प्रशासन शीघ्र ही सरकार को सौंपेगा। कच्चीघाटी में असुरक्षित भवनों को गिराने से पहले इन्हें बचाने की संभावना तलाशने के लिए आइआइटी मंडी, एनआइटी हमीरपुर, लोक निर्माण विभाग के विशेषज्ञ सहित कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने जब मौके का दौरा किया था तो शहर के आला अधिकारी भी मौजूद रहे।
एक महीना पहले गिरी थी आठ मंजिला इमारत
कच्चीघाटी में महीना भर पहले आठ मंजिला इमारत के अचानक गिरने के कारण साथ लगती इमारतों के ढहने का खतरा बन गया था। इस कारण जानमाल के नुकसान की आशंका बनी हुई है। आठ मंजिला इमारत दर्शन काटेज में शिमला के बड़े कारोबारी गुरबचन सिंह और गुरमीत सिंह के परिवार रहते थे। इसके अलावा केआर शर्मा, राजीव सूद, नारायण सिंह और विक्की सूद के परिवार भी रहते थे। सभी परिवारों को सुरक्षित दूसरी जगह पर ठहराया गया है। इस इमारत की चपेट में दोमंजिला इमारत भी आ गई थी। यह मकान निर्मला भवन था। इसके अलावा इमारत के ढहने से दो बहुमंजिला इमारतें भी खतरे की जद में हैं। उनमें से एक हरी पैलेस नामक होटल है। इसके साथ बनी एक अन्य इमारत है। दोनों इमारतों को खाली करवा दिया गया है।
भवनों को तोडऩे के बजाय बचाने पर काम कर रहा निगम
पहले निगम ने दोनों भवनों को तोडऩे के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने इन भवनों को तोडऩे के बजाय बचाने पर भी काम करने के निर्देश जारी किए थे। इस पर ये काम आइआइटी मंडी व एनआइटी हमीरपुर के विशेषज्ञों को काम सौंपा था। कमेटी ने अब तैयार की गई रिपोर्ट में साफ किया है कि भवन निर्माण पर भविष्य में पूरी तरह से रोक रहे। साथ ही भवनों को बचाने के लिए यदि संभावना है तो मालिक अपने रिस्क पर बचाने का काम करें।
