शिमला, जागरण संवाददाता। Himachal Excise Policy, हिमाचल में आबकारी नीति हमेशा चर्चा में रहती है। भले ही सरकार किसी की भी रहे, नेता अपनी सुविधा के हिसाब से आबकारी नीति और इसके बिंदुओं को तय करते हैं। पूर्व सरकार के समय शराब की थोक बिक्री के लिए एक निगम का अलग से ही गठन किया गया। इसके गठन पर शुरू से सवाल उठे। भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए चार्जशीट में भी इसे शामिल किया। सरकार बदलने के बाद इसे बंद तो कर दिया, लेकिन इसको खोलने से किसे फायदा हुआ और क्या-क्या इसमें कारगुजारी रही। इसे खंगालने का काम नहीं हो सका।

प्रदेश में शराब की अवैध बिक्री पकडऩे के लिए लंबे समय से विभाग को अपनी पुलिस देने की चर्चा चल रही है। यह योजना भी जमीन पर नहीं उतर पा रही है। इसमें विभाग की ओर से तर्क दिया जाता रहा है कि विभाग के अधिकारी निहत्थे शराब माफिया पर हाथ डालते हैं तो उन पर हमला कर दिया जाता है। पूर्व सरकार के समय में ही सोलन जिला के कंडाघाट में इसी तरह से शराब माफिया ने आबकारी विभाग की टीम पर जानलेवा हमला किया था इसमें विभाग के कई अधिकारी घायल हुए थे। इसके बाद से लगातार ही आबकारी विभाग की पुलिस के गठन की मांग उठने लगी। इसका प्रस्ताव विभाग की ओर से सरकार को भेजा गया था, लेकिन आज तक इस पर कुछ नहीं हुआ।

आलम यह है कि हर बार आबकारी नीति राजस्व बढ़ाने तक चर्चा में होती है। अवैध शराब की बिक्री को कैसे रोका जाएगा, इस पर मंथन नहीं होता। इसी का परिणाम है कि राज्यभर में शराब की अवैध बिक्री का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। अब तो हिमाचल में जहरीली शराब बेचने तक के मामले भी सामने आने लगे हैं। इससे पहले देश के बड़े राज्यों में ऐसे मामले आते थे। अब हिमाचल में जहरीली शराब पीने से लोग मरे हैं तो क्या आने वाले समय में सरकार अपनी नई आबकारी नीति में इसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई बड़ा कदम उठाएगी या फिर हर साल की तरह आबकारी नीति में सरकार के राजस्व पर ही बात होगी।

नई नीति में प्रविधान करने की उम्मीद

शराब की अवैध बिक्री को रोकने के लिए कोई खास प्रविधान नहीं है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए फरवरी या मार्च में नई आबकारी नीति आ रही है। चुनावी साल में प्रदेश सरकार लोगों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए किस तरह से पालिसी तैयार करती है। इसका सभी को इंतजार रहेगा।

Edited By: Virender Kumar