पालमपुर, जेएनएन। हिमाचली युवा दौड़ने में सक्षम नहीं हैं। जी हां! इसका खुलासा हुआ है कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के मैदान में टेरिटोरियल आर्मी के लिए आयोजित की जा रही भर्ती प्रक्रिया के दौरान। शनिवार को तीसरे दिन 6300 युवाओं ने दौड़ में भाग लिया लेकिन इनमें से मात्र 325 ही पहली बाधा पार कर सके। मेजर डीके शर्मा ने बताया कि शनिवार को चंबा, कांगड़ा, लाहुल-स्पीति, कुल्लू और मंडी जिलों के युवाओं ने भर्ती में भाग लिया। रविवार को सोलन, सिरमौर, शिमला, हमीरपुर, ऊना, किन्नौर जिलों के युवाओं को मौका दिया जाएगा।

टेरिटोरियल आर्मी में बेशक दो माह के लिए ही सेना में काम करवाते हैं पर देशभक्ति के जज्बे के आगे मुश्किलों को पार करने में युवा जी-जान लगाए हुए हैं। सैन्य अधिकारी उन युवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कि छह फीट के हैं। मेजर डीके शर्मा के अनुसार हिमाचल के युवाओं को सेना में काफी पसंद किया जाता है। शुक्रवार देर रात प्रदेश के विभिन्न जिलों से युवा पालमपुर में पहुंचे और शनिवार को भी यह सिलसिला जारी रहेगा। युवाओं के लिए सामाजिक संस्था शनि सेवा सदन ने खाने के लिए व्यवस्था की है।

युवाओं ने शनिवार को नेशनल हाइवे पर आने वाली वर्षाशालिकाओं में थकान मिटाई। टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती युवा दो माह के लिए सेना में सेवाएं देते हैं। हालांकि इस दौरान काम के हिसाब से सेवाओं को बढ़ा भी दिया जाता है। इस दौरान युवाओं को सभी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। भर्ती प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने आए हुए अधिकारी भी विभिन्न रेजीमेंटों के साथ काम करते हुए टेरिटोरियल आर्मी में भी सेवाएं देते हैं।

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