हिमाचल में गेहूं की बिजाई से पहले किसानों के लिए खाद का संकट, 550 रुपये तक दाम भी बढ़ गए
हिमाचल में गेहूं की बिजाई से पहले किसान खाद की कमी और 550 रुपये तक बढ़े दामों से चिंतित हैं, ...और पढ़ें

खाद की कमी के कारण गेहूं की बिजाई पर संकट हो गया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
गेहूं बिजाई से पहले किसानों को खाद की कमी।
खाद के दाम में 550 रुपये तक की वृद्धि हुई।
हिमाचल में कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित।
राजेंद्र डोगरा, धर्मशाला। गेहूं की बिजाई का समय नजदीक आते ही किसानों की खाद को लेकर चिंता बढ़ गई है। 12:32:16 खाद की कमी से किसानों की ओर से गेहूं के लिए की जाने वाली बिजाई को लेकर और समय रुकना पड़ सकता है। हालांकि ज्यादातर गेहूं की बिजाई का समय 15 नवंबर के बाद शुरू होता है, लेकिन अब इसके लिए भी कुछ ही समय रह गया है।
खाद की कमी के बीच किसान सहकारी समितियों और खाद विक्रेताओं के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऐसे में समय पर खाद नहीं मिली तो गेहूं की बिजाई में देरी हो सकती है।
रा मटीरियल की कमी से संकट
हिमाचल में रा मटीरियल की कमी के कारण 12:32:16 खाद तैयार नहीं हो पा रही है। इसके लिए अब अन्य राज्यों पर ही निर्भर हैं। हालांकि, अब धीरे-धीरे खाद की खेप कांगड़ा पहुंचनी शुरू हो गई है, लेकिन किसानों की जरूरत को पूरा करने के लिए आपूर्ति बढ़ाना जरूरी है।
550 रुपये तक बढ़ गए दाम
पिछले साल खाद का भाव 1900 रुपये था, जबकि इस साल यह 2450 रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में खाद की कमी और बढ़ती कीमतों ने किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
700 से 800 मीट्रिक टन खाद की भेजी गई है डिमांड
कांगड़ा-चंबा इफ्को के एरिया मैनेजर श्रेय सूद का कहना है कि इफ्को की ओर से कांगड़ा जिला के लिए 700 से 800 मीट्रिक टन खाद की डिमांड भेजी गई है। खाद की आपूर्ति कुछ ट्रेन और कुछ ट्रकों के माध्यम से हो रही है। अब धीरे-धीरे खाद की खेप पहुंचना शुरू हुई है। कांगड़ा जिले में इफ्को की करीब 150 सहकारी समितियां हैं, जिनके माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाई जाती है। अगले सप्ताह तक और खाद पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, अभी तक यह आंकड़ा साफ नहीं हो पाएगा कि कुल कितनी खाद की सप्लाई हुई है।
हिमफेड की ओर से यूरिया 2250 रुपये और डीएपी 1350 रुपये के भाव के करीब 20 हजार बैग सप्लाई किए गए हैं। हिमफेड के पास 12:32:16 नहीं है। यह इफ्को की सोसायटी में उपलब्ध है। हालांकि अभी 15 नवंबर तक का समय गेहूं की बिजाई के लिए पड़ा है।
-प्रदीप शर्मा, एरिया मैनेजर, हिमफेड, नगरोटा बगवां।
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