शिमला, जागरण संवाददाता। Himachal Swarn Urja Niti, हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में शुक्रवार को नई ऊर्जा नीति को स्वीकृति दी गई। इसे 'नई स्वर्ण ऊर्जा नीति' नाम दिया है। इसमें प्रदेश की ऊर्जा नीति को हरित बनाने की पहल है। 2030 तक 10000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इसमें हाइड्रो, सोलर और अन्य सभी तरह के विकल्पों को शामिल किया जाना है। कुल मिलाकर बिजली के क्षेत्र में नौ साल में दो लाख करोड़ का निवेश होगा। एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रदेश सरकार को 4000 करोड़ का राजस्व हर साल मिलने वाली निश्शुल्क बिजली को बेचकर मिलेगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ऊर्जा विभाग की ओर से यह प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव में विस्तार से चर्चा करने के बाद स्वीकृति दे दी। हिमाचल की नई ऊर्जा नीति में पहली बार राज्य को वाटर बैटरी के रूप में देशभर में विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

इस तरह से वाटर बैटरी बनेगा हिमाचल

प्रदेश में प्रोजेक्ट लगाने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रायल्टी में छूट, एलडीएफ में छूट, भूमि अधिग्रहण के लिए पंजीकरण में छूट दी जाएगी। छोटी परियोजनाओं के लिए इनपुट ऊर्जा व आउटपुट ऊर्जा में कई तरह की छूट दी जाएगी।

नई ऊर्जा नीति की विशेषताएं

10000 मेगावाट अतिरिक्त हरित ऊर्जा का उत्पादन जल बैटरी के रूप में किया जाएगा। प्रदेश में शत-प्रतिशत हरित ऊर्जा ग्रीन होगी। सामुदायिक स्वामित्व की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। औद्योगिक उत्पाद में शत-प्रतिशत हरित ऊर्जा का इस्तेमाल हो सकेगा। विद्युत वाहनों और चार्जिंग के लिए नीति बनेगी। जल पर्यटन को विकसित करने के लिए जोर दिया जाएगा। इसके तहत जल पर्यटन जहां भी विकसित होगा। वहां पर वाच टावर से लेकर अन्य कार्यों पर काम होगा।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma