शिमला, प्रकाश भारद्वाज। Himachal Pradesh News, यूं तो सरकारी विभागों में कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस काम में लापरवाही बरतने सहित कई कारणों से हाथ में थमाया जाता है। कर्मचारी कारण बताओ नोटिस का जवाब बहुत सहजता से देते हैं। लेकिन धूप सेंकने वाले कर्मचारियों को इस तरह का नोटिस दिया गया हो, ऐसा शायद पहली बार हुआ। शिमला में सर्दियां शुरू होते ही कर्मचारी सूरज की तपिश लेने के लिए कार्यालय से बाहर निकलते हैं। परंतु ऐसा दोपहर के भोजन के समय पर रहता है कि कर्मचारी भोजन करने के बाद धूप सेंकते नजर आएंगे। लेकिन परिवहन मुख्यालय ऐसे स्थान पर है, जहां पर सूरज की किरणें पड़ती नहीं हैं।

अब हुआ यूं कि कर्मचारी कार्यालय पहुंचते ही अपना बैग सीट पर रखकर बाहर निकलकर धूप सेंकने पहुंचते थे। अधिकांश कर्मचारी इसी तरह से कई दिन से धूप सेंकने के लिए निकल रहे थे। सरकारी कामकाज को संचालित करने के लिए प्रबंधन को कर्मचारियों को सीट पर बिठाने के लिए कारण बताओ नोटिस निकालना पड़ा।

अधिकारियों को राजनीति तो करनी है, नामांकन करना नहीं आया

सचिवालय में अधिकारियों व कर्मचारियों की एसोसिएशन के द्विवार्षिक चुनाव होते रहते हैं। इसी सप्ताह शुरुआती दिनों में सचिवालय राजपत्रित अधिकारियों के चुनाव के लिए अधिसूचना निकाली गई। भले की अधिकारी प्रशासनिक कामकाज में पारंगत होंगे, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए बनाया गया फार्म भरने में गच्चा खा गए। पांच-छह अधिकारियों को चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया गया नामांकन पत्र भरने में मुश्किल आई। इन अधिकारियों से प्राप्त हुए फार्म में त्रुटियां पाई गईं। अब सचिवालय में अधिकारी स्तर की सियासत करनी है तो नामांकन पत्र भरने की औपचारिकता तो पूरी करनी पड़ेगी ही।

कांग्रेस की सरकार बना रहे आला अधिकारी

सचिवालय में बैठने वाले आला अधिकारी कांग्रेस की सरकार बना रहे हैं। आर्म्सडेल बिल्डिंग के किसी भी माले में बैठने वाले अधिकारियों के कमरों में पहुंच जाएं। बैठते ही साहब पूछते हैं कि किसकी सरकार बन रही है। यदि सामने बैठा व्यक्ति कांग्रेस उम्मीदवारों के जीतने का गुणा भाग करने लगे तो सवाल-जवाब नहीं होता। जैसे ही किसी ने सत्तारूढ़ भाजपा की सरकार बनाने का गणित बिठाया तो उस पर सवालों की बौछार होती है। सचिवालय के पुराने और नए भवन में तो इसी तरह का नजारा देखने को मिल रहा है। वैसे तो ओपीएस की मांग को लेकर खुलकर बाहर आए कर्मचारी तो कांग्रेस के पक्षधर हैं, लेकिन अधिकारियों के मनोभाव चौंकाने वाले हैं। वैसे अधिकारी अपनी राय गहन पूछताछ के बाद ही बनाते हैं। आमतौर पर आला अधिकारियों के कमरों में प्रत्येक व्यक्ति को चाय-काफी-ग्रीन टी आफर की जाती है। सचिवालय के हर कमरे में रोजाना सरकार बनाने पर मंथन होता है।

बहुत कम होंगे दस हजारी

14वीं विधानसभा चुनाव में जीतने वाले नेताओं में दस हजारी बहुत कम होंगे। इसके मायने ये हुए कि चुनाव कांटे की टक्कर का है और जीत-हार कुछ हजार या सैकड़ों मतों के अंतर से होने वाली है। पिछले विधानसभा चुनाव में दहाई से अधिक नेता दस हजार मतों के अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इस तरह का आकलन भाजपा व कांग्रेस दोनों ओर से किया जा रहा है। बदलाव की आंधी आने की किसी को भी आशा नहीं है। कांग्रेस की ओर से तो अभी से तोड़फोड़ होने आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। दूसरी ओर भाजपा सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त है। लेकिन सियासत का कटु सत्य यह रहने वाला है कि राजनीति के तीसमार खां गिनती के मतों के अंतर से जीतेंगे और हारेंगे। यही वजह है कि चुनावी रण में उतरे सभी नेताओं की नींद उड़ी हुई है। अब देखना यह है कि कितने नेता दस हजार मतों के अंतर से जीतने में सफल रहते हैं।

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Edited By: Rajesh Kumar Sharma

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