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हिमाचल में 2 महीने बाद शुरू होगा पैराग्लाइडिंग का रोमांच, कुल्लू में ब्यास की लहरों में उतरेंगी राफ्ट; नियम कड़े

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 14 Sep 2026 02:00 PM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 02:05 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध बीड़ बिलिंग घाटी में दो महीने के प्रतिबंध के बाद पैराग्लाइडिंग फिर से शुरू हो ...और पढ़ें

बीड़ बिलिंग में पैराग्लाइडिंग का रोमांच शुरू होगा। जागरण आर्काइव

बीड़ बिलिंग में पैराग्लाइडिंग का रोमांच शुरू होगा। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. बीड़ बिलिंग में 16 सितंबर से पैराग्लाइडिंग का रोमांच फिर शुरू।

  2. कुल्लू में 15 सितंबर के बाद ब्यास नदी में राफ्टिंग भी।

  3. सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।

मुनीश दीक्षित, बीड़ (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध बीड़ बिलिंग घाटी में एक बार फिर पैराग्लाइडिंग का रोमांच शुरू होने जा रहा है। बरसात के कारण करीब दो माह तक बंद रहने के बाद 16 सितंबर से बिलिंग की पहाड़ियों से पर्यटकों और पायलटों की उड़ानें फिर आसमान में नजर आएंगी। पैराग्लाइडिंग सीजन को लेकर पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन और बैजनाथ प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

बीड़ में तैनात साडा एवं पर्यटन विभाग के सुपरवाइजर रणविजय ने बताया कि बिलिंग टेक ऑफ साइट को पैराग्लाइडिंग के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया गया है। साइट पर जो छोटी-मोटी कमियां रह गई हैं, उन्हें भी दूर किया जा रहा है। 16 सितंबर से पैराग्लाइडिंग गतिविधियां दोबारा शुरू कर दी जाएंगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर

पैराग्लाइडिंग में सुरक्षा को लेकर बिलिंग टेक ऑफ साइट पर चार मार्शल तैनात रहते हैं। ये मार्शल उड़ान भरने वाले पायलटों के आवश्यक दस्तावेजों और पंजीकरण की जांच करते हैं। नियमों के अनुरूप पायलटों को ही उड़ान की अनुमति दी जाती है।

टेंडम फ्लाइंग के लिए 350 पायलट 

बिलिंग में टेंडम फ्लाइंग के लिए करीब 350 पायलट पंजीकृत हैं। टेंडम उड़ान में पर्यटक एक प्रशिक्षित एवं अधिकृत पायलट के साथ पैराग्लाइडिंग का आनंद लेते हैं। इसके अलावा देश-विदेश से आने वाले अनुभवी पायलट सोलो फ्लाइंग के लिए भी बीड़ बिलिंग पहुंचते हैं।

टेंडम और सोलो फ्लाइंग में क्या अंतर

टेंडम पैराग्लाइडिंग में एक पैराग्लाइडर पर दो लोग उड़ान भरते हैं। आगे पायलट होता है, जबकि पीछे पर्यटक बैठता है। इसमें पर्यटक को पैराग्लाइडिंग का रोमांच लेने के लिए स्वयं पैराग्लाइडर नियंत्रित करने की जरूरत नहीं होती।

वहीं सोलो पैराग्लाइडिंग में प्रशिक्षित पायलट अकेले उड़ान भरता है और पैराग्लाइडर का नियंत्रण स्वयं करता है। बीड़ बिलिंग में देश-विदेश के अनुभवी पैराग्लाइडर मौसम और हवा की परिस्थितियों के अनुसार लंबी उड़ानों का आनंद लेने पहुंचते हैं।

दुनिया के प्रसिद्ध पैराग्लाइडिंग स्थलों में शुमार बीड़ बिलिंग

बीड़ बिलिंग अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और अनुकूल हवा के कारण दुनिया के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थलों में अपनी खास पहचान बना चुका है। बिलिंग को टेक ऑफ साइट और बीड़ को लैंडिंग साइट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। समुद्र तल से करीब 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बिलिंग से उड़ान भरकर पैराग्लाइडर बीड़ की ओर उतरते हैं।

यहां दो बार पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप का आयोजन हो चुका है, जबकि 10 से अधिक बार यहां पर प्री वर्ल्ड कप आयोजित हो चुका है। 

इन खासियत के कारण विदेशी भी कायल

यहां की ऊंचाई, घाटी की भौगोलिक बनावट और उड़ान के लिए अनुकूल हवाएं पैराग्लाइडिंग को खास बनाती हैं। बीड़ बिलिंग में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी पैराग्लाइडर पहुंचते हैं। यही वजह है कि इसे भारत की पैराग्लाइडिंग राजधानी के रूप में भी पहचान मिली है। यहां से पायलट 200 किलोमीटर तक की फ्लाइंग कर सकते हैं। 

बेहतरीन प्राकृतिक सुंदरता

बीड़ में पैराग्लाइडिंग के साथ-साथ तिब्बती संस्कृति, मठ, प्राकृतिक सौंदर्य और धौलाधार की पहाड़ियों का मनोरम दृश्य भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। पैराग्लाइडिंग सीजन शुरू होने के साथ ही क्षेत्र के पर्यटन कारोबारियों, होटल और होमस्टे संचालकों तथा स्थानीय व्यवसायियों को भी पर्यटन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

नियमों के पालन पर प्रशासन की नजर

बैजनाथ के एसडीएम संकल्प गौतम ने बताया कि पैराग्लाइडिंग के दौरान सभी निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह तत्पर है। सुरक्षा व्यवस्था और पैराग्लाइडिंग गतिविधियों की लगातार समीक्षा की जाती है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों और पायलटों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पैराग्लाइडिंग गतिविधियों का सुचारू संचालन करना है।

कुल्लू में राफ्टिंग का रोमांच

उधर, कुल्लू में ब्यास की लहरों के बीच राफ्टिंग का दौर भी शुरू हो जाएगा। 15 सितंबर तक राफ्टिंग पर भी प्रतिबंध रहता है, जो अब हट जाएगा। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश में 15 सितंबर के बाद पर्यटन सीजन रफ्तार पकड़ लेता है। प्रशासन की ओर से नियम कड़े रहेंगे। सुरक्षा उपकरण व लाइफ जैकेट के साथ ही राफ्टिंग की अनुमति होगी। 

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