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फोरलेन में अड़ंगा: शाहपुर में 3.46 करोड़ मुआवजा देने के बाद भी खाली नहीं किया भवन, हिमाचल हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 19 Jul 2026 06:40 AM (IST)Updated: Sun, 19 Jul 2026 11:05 AM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने पठानकोट-मंडी फोरलेन निर्माण में बाधा डालने वालों पर कड़ा रुख अपनाया है। शाहपुर में मुआवजा मिलने ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने फोरलेन निर्माण में बाधा पर कड़ा रुख अपनाया।

  2. शाहपुर में भवन खाली करने को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया।

  3. मुआवजा मिलने के बावजूद कब्जाधारियों ने भवन नहीं छोड़ा।

जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना के निर्माण में आ रहे अवरोधों पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला कांगड़ा के शाहपुर में फोरलेन की जद में आए एक भवन को खाली न करने और ध्वस्तीकरण की राह में रोड़ा अटकाने वाले कब्जाधारियों को अदालत ने तीन दिन के भीतर परिसर खाली करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान के तहत दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। 

पहली मंजिल पर कब्जा बनाए रखने से नहीं गिरा पा रहे भवन

अदालत के संज्ञान में लाया गया था कि संबंधित भवन पर निशान लगाए जा चुके हैं, लेकिन प्रतिवादी आर्चित, अर्पित और राजेश कुमारी द्वारा पहली मंजिल पर कब्जा बनाए रखने के कारण एनएचएआइ या प्रशासनिक टीम इसे गिरा नहीं पा रही है।

चिह्नित हिस्से को तुरंत ध्वस्त करें

इस पर नाराजगी जताते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट का पुराना आदेश अब सक्षम अधिकारियों के आड़े नहीं आएगा। खंडपीठ ने आदेश दिया कि चिह्नित हिस्से को तुरंत ध्वस्त किया जाए। 

मुआवजा जारी, भूमि का हक एनएचएआई के पास

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी साफ किया कि इस मामले से जुड़े विभिन्न प्रभावितों के लिए 3.46 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि पहले ही जमा की जा चुकी है। अब केवल पक्षों के बीच इस राशि के बंटवारे का अधिकार तय होना बाकी है, जबकि कानून के प्रविधानों के तहत संबंधित भूमि का मालिकाना हक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) का हो चुका है।

15 दिन बाद सरकार एक्शन ले

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि यदि निजी प्रतिवादी अगले 15 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो सरकार कानूनन आवश्यक कार्रवाई अमल में लाए। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

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