शिमला, जागरण संवाददाता। कोरोना काल के दौरान सरकारी स्कूलों के बच्चों से वसूली गई कंप्यूटर फीस माफ करने की तैयारी है। अभिभावकों के दबाव के बाद शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने शिक्षा विभाग को इस मामले को एग्जामिन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इसका पूरा प्रस्ताव तैयार करें। इसमें बताना होगा कि कितने बच्चों से यह फीस वसूली गई है। बच्चों पर इसका मासिक कितना वित्तीय भार पड़ा है। यदि जरूरी हुआ तो इसे मंत्रिमंडल की बैठक में ले जाया जाएगा।

कोरोना महमारी के खतरे को देखते हुए हिमाचल में 13 मार्च से सभी शिक्षण संस्थान बंद पड़े हुए हैं।  सरकार ने निजी स्कूलों से सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के निर्देश दिए थे, दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में बच्चों से कंप्यूटर फीस भी वसूली जा रही है। स्कूल बंद होने से कंप्यूटर विषय प्रैक्टिकल के तौर पर पढ़ाया नहीं जा रहा है। इसके बावजूद नवीं से जमा दो कक्षा के हजारों विद्यार्थियों से 110 रुपये और एससी/ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों से 55 रुपये प्रति माह फीस ली जा रही है। इससे अभिभावकों में खासा रोष है।

संवाद कार्यक्रम में उठा था मामला

पिछले सप्ताह शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के छात्रों के साथ संवाद किया था। इस कार्यक्रम में भी राज्य भर से कई अभिभावकों ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर के समक्ष इस मांग को उठाया था। अभिभावकों का कहना था कि जब तक स्कूल नहीं लगते तब तक बच्चों से कंप्यूटर फीस न वसूली जाए।

पीजीटी आइपी संघ ने भी उठाया था मसला

इससे पहले पीजीटी आईपी संघ ने भी सरकार के समक्ष यह मामला उठाया था। संघ के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम, महासचिव रंजीत ने कहा था कि कोरोना संकट के बीच कई लोगों की आय के साधन सीमित हो गए हैं। सरकारी स्कूलों में ज्यादातर गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं जो कंप्यूटर शिक्षा ग्रहण करना तो चाहते हैं, लेकिन फीस देने में असमर्थ हैं। फीस की वजह से बच्चेे कंप्यूटर विषय छोडऩे पर मजबूर हैं। ऐसे में उनकी फीस माफ होनी चाहिए।

विभाग की रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा शिक्षा विभाग को इस मामले को एग्जामिन करने के लिए कहा है। विभाग की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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