धर्मशाला, जेएनएन। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा, यह निर्णय धर्मगुरु दलाई लामा खुद लेंगे और यह भी तय करेंगे कि दलाई लामा संस्था को जारी रखना है या नहीं। उनके इस निर्णय पर चीन का कोई अधिकार नहीं है। इसके अलावा उनके पुनर्जन्म के बारे में कोई भी निर्णय लेने पर भी चीन का कोई अधिकार नहीं है। निर्वासित तिब्बतीय प्रधानमंत्री डॉ. लॉबसांग सांग्ये ने यह बात धर्मशाला में आयोजित तिब्बती समुदाय के लोगों की तीन दिवसीय बैठक के दौरान एक इंटरव्यू में कही। बैठक में विश्व के 24 देशों के तीन सौ से अधिक लोग दलाईलामा और तिब्बती लोगों के वंश के बीच संबंधों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं।

सांग्ये ने कहा कि दलाई लामा के संबंध में कुछ भी कहने का अधिकारी खासकर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को नहीं, जिसमें सभी नास्तिक सोच के लोग हैं और ये कहते हैं कि धर्म एक जहर है और धार्मिक अभ्यास को हतोत्साहित करता है। सांग्ये कहते हैं कि चीन बार-बार यह बात दोहराता है कि दलाईलामा समेत तिब्बती बौद्ध हस्तियों के पुनर्जन्म के निर्णय की विरासत खुद दलाईलामा को भी चीन से ही मिली है, जोकि सरासर गलत है।

अगर चीन दलाई लामा के बाद अपने नामित चेहरे को उनका उत्तराधिकारी घोषित कर भी देता है तो तिब्बती समुदाय उसका सम्मान नहीं करेगा। उनका कहना है कि दलाईलामा ने ये पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि 90 साल की आयु के बाद वे धार्मिक गुरुओं और जनता से परामर्श करने के बाद ही निर्णय लेंगे कि उनकी दलाईलामा संस्था को जारी रखा जाए या नहीं।

Posted By: Rajesh Sharma

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