परिवेश महाजन, जयसिंहपुर

यहां पर अग्निशमन विभाग जिम्मेदारी को तो बखूबी निभा रहा है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में अभी कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक न तो विभाग के पास अपना भवन है और न ही यहां पर हाइड्रेंट की सुविधा है। किसी भी आपात स्थिति में वाहन में पानी भरने के लिए जयसिंहपुर से पांच किलोमीटर दूर हलेड़ में जाना पड़ता है।

यहां फायर ब्रिगेड की चौकी खुलने से पहले आग की किसी घटना पर काबू पाने के लिए लोगों को सुजानपुर या पालमपुर पर निर्भर होना पड़ता था। जयसिंहपुर में फायर ब्रिगेड की चौकी 29 सितंबर, 2016 में खुली थी लेकिन इतने वर्ष बीतने के बाद भी अग्निशमन चौकी को न तो अपना भवन नहीं मिल पाया है और न ही गाड़ियों में पानी भरने के लिए हाइड्रेंट की सुविधा मिल पाई है। हालांकि जयसिंहपुर सब्जी मंडी के पास भवन निर्माण का कार्य चल रहा है। मौजूदा समय में इस चौकी में फायर अफसर सहित 12 कर्मचारी तैनात हैं जबकि तीन फायरमैन के पद रिक्त हैं। चौकी में एक छोटी व एक बड़ी गाड़ी है। अग्निशमन चौकी के तहत तिनबड़, चढियार, सरिमोलग, आलमपुर , शिवनगर, तक का क्षेत्र आता है।

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हाइड्रेंट के लिए विभाग को लिखा है। स्वीकृति मिलने पर व्यवस्था हो जाएगी। जयसिंहपुर चौकी के तहत क्षेत्र काफी बड़ा है और भोगौलिक परिस्थियां भी जटिल हैं। ऐसे में यहां दो बड़े अग्निशमन वाहन होने चाहिए। अब तक के रेस्क्यू ऑपरेशन में लगभग 2.5 करोड़ की संपत्ति आग से बचाई है।

-जितेंद्र कुमार, अग्निशमन अधिकारी फायर चौकी जयसिंहपुर ।

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जयसिंहपुर में अग्निशमन ऑफिस खुलने से लोगों को राहत मिली है। गर्मियों के मौसम में अक्सर आगजनी से काफी नुकसान होता था। पानी भरने के लिए अभी वाहनों को दूर जाना पड़ता है, यह भी देखा जाना चाहिए।

राजिद्र शर्मा।

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पानी भरने के लिए वाहनों को दूर जाना पड़ता है। किसी भी बड़ी घटना के समय दोबारा से पानी भरने का एकमात्र विकल्प हलेड में है। सबसे बड़ी कमी यहां पर हाइड्रेंट का न होना है।

अनूप शर्मा।

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कोरोना काल में भी अपने कर्तव्य का बेहतरी से निर्वहन किया है। जहां भी जरूरत पड़ी है उस क्षेत्र को सैनिटाइज किया है। सरकार को विभाग के कर्मियों के लिए उचित सुविधाएं मुहैया करवानी चाहिए।

चुनी लाल।

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फायर ब्रिगेड चौकी को हाइड्रेंट की सुविधा सरकार को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध करानी चाहिए। गाड़ी में पानी भरने के लिए कम समय लगे और दूर जाने में उनका समय भी नष्ट न होने पाए। -सुमित धीमान

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