धर्मशाला, जागरण संवाददाता। तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने टीचिंग के दूसरे दिन रविवार को स्वार्थ छोड़कर विश्व हित की बात करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, राजनीति में धर्म का समावेश नहीं होना चाहिए, इसके दुष्परिणाम ही आते हैं। राष्ट्र संचालन में राजनीति का अपना नाम व स्थान है, जबकि धर्म इससे बहुत ऊपर और पवित्र होता है। इन दोनों का समावेश नहीं करना चाहिए। आजकल देखने को मिलता है कि कुछ लोग राजनीति में धर्म को शामिल करके आगे बढऩे का प्रयास करते हैं। इससे कुछ सही नहीं होगा।

धर्मगुरु दलाईलामा ने अनुयायियों से कहा कि सभी धर्म शांति का संदेश देते हैं। मनुष्य किसी न किसी माध्यम से एक-दूसरे पर निर्भर है, इसलिए सभी में एकजुटता का भाव होना चाहिए। विश्व शांति के लिए धर्म का अध्ययन जरूरी है, इससे अध्ययन में करूणा का भाव बढ़ता है। केवल मंत्र जाप नहीं, अपने जीवन की पद्धति में सद-बदलाव ही धर्म का उद्देश्य होता है। कुछ लोगों की धारणा होती है कि केवल बौद्ध भिक्षु ही धर्म का अध्ययन करेंगे, लेकिन ये गलत है कोई भी व्यक्ति धर्म का अध्ययन कर सकता है। इसके लिए कोई प्रतिबंध नहीं है।

दलाईलामा ने कहा कि आज पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है, लेकिन कई कोरोना योद्धा आज भी दिन-रात सेवाएं देकर अपना कर्म कर रहे हैं। हमें चाहिए कि संकट की घड़ी में प्रशासन, मेडिकल स्टाफ व पुलिस जवानों का सम्मान करें। सभी को खुद तक सीमित होने के बजाय विश्वहित के बारे में चिंतन करने की जरूरत है। दलाईलामा ने कहा कि भारत की संस्कृति में पूरे विश्व की संस्कृतियां शामिल हैं, जोकि शांति का संदेश देती हैं।

Posted By: Rajesh Sharma

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