शिमला, प्रकाश भारद्वाज। सबसे बेहतर उदाहरण वही है जो अपने आचरण से दिया जाए। कोरोना काल में ऐसा ही एक उदाहरण इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आइजीएमसी) शिमला के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सांतवना वर्मा ने दिया है। उन्होंने 13 मार्च से कोई अवकाश नहीं लिया। सैंपल की जांच के लिए वह दिन-रात अपनी टीम के साथ डटी हैं। प्रो. सांतवना को याद नहीं कि पिछले चार महीनों के दौरान उन्होंने घर पर बच्चों के साथ कब समय बिताया है। सुबह जब बच्चे उठते हैं तो वह आइजीएमसी पहुंच चुकी होती हैं। जब वह आधी रात को घर लौटती हैं तो बच्चे सो चुके होते हैं।

कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य विभाग के कर्मी अग्रणी पंक्ति में सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सकों के साथ पैरामैडिकल स्टॉफ कोरोना संक्रमण रोकने के लिए मुस्तैदी से डटा है। आइजीएमसी में सांतवना के साथ उनकी टीम पूरी मेहनत से काम को अंजाम दे रही है। कोरोना संक्रमितों के सैंपल की जांच के अतिरिक्त अस्पताल में आने वाले मरीजों के सामान्य टेस्टों की जांच रिपोर्ट देने का कार्य भी समयानुसार पूरा हो रहा है। आइजीएमसी के प्रधानाचार्य व वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक ने माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की टीम की सराहना की है।

नौ जिलों के सैंपल की जांच

कोरोना काल के शुरुआती दिनों में आइजीएमसी के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग में प्रदेश के नौ जिलों के सैंपल की जांच होती थी। लाहुल-स्पीति, किन्नौर, शिमला, सिरमौर, सोलन, मंडी, हमीरपुर, कुल्लू और बिलासपुर जिलों से कोरोना सैंपल जांच के लिए आते थे। अब यहां पर लाहुल-स्पीति, किन्नौर, शिमला, बिलासपुर और कुल्लू जिला के निरमंड व आनी के सैंपल की जांच हो रही है।

घर पर बच्‍चों का ध्‍यान रखना हुआ मुश्किल पर महामारी के दौर में दायित्‍व निर्वहन जरूरी

कोरोना महामारी के दौर में हमारा दायित्व है कि जहां तक संभव हो, सेवाएं देने के लिए तत्पर रहें। करीब चार महीने से अवकाश न लेने के कारण घर पर बच्चों का ध्यान रखना मुश्किल हो गया है। हमारी लैब में कोरोना वायरस का पीसीआर परीक्षण करने की अनुमति नौ मार्च को एनआइबी पुणे से मिली थी। पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट पांच से छह घंटे में तैयार होती है। -प्रो. सांतवना वर्मा, अध्यक्ष, माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग, आइजीएमसी शिमला

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