ज्वालामुखी, संवाद सहयोगी। हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाएं कर्मचारी संघ के कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को दो टूक शब्दों में कह दिया है कि बायोमीट्रिक मशीनों से राशन वितरण नहीं किया जाएगा। सरकार से बार-बार आग्रह करने पर भी बायोमीट्रिक मशीनों के बिना राशन वितरण करने की स्वीकृति सरकार से न मिलने पर सहकारी सभाओं के कर्मचारी वर्ग में सरकार के प्रति खासा रोष दिखाई देने लगा है।

हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाओं के प्रदेशाध्यक्ष सर्वजीत, उपाध्यक्ष जगत राम, वित्त सचिव एवं मीडिया प्रभारी सीताराम वालिया, महासचिव रजनीश गुलेरिया अशोक शर्मा प्रेस सचिव संजीव चौहान व अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार को हिमाचल प्रदेश की 4830 सहकारी सभाओं के लगभग 15000 कर्मचारियों की जान की फिक्र नहीं है। यही कारण है कि बार-बार संघ द्वारा मांग करने पर भी बिना बायोमीट्रिक मशीनों के राशन वितरण करने के लिए सरकार से स्वीकृति नहीं मिल पाई है, लेकिन सहकारी सभाओं के कर्मचारियों ने निर्णय लिया है कि वे जान जोखिम में लेकर बायोमेट्रिक मशीनों से राशन का वितरण नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि राशन वितरण करने वाले संघ के कर्मचारियों को कोरोना योद्धा का दर्जा दिया जाए और यदि किसी के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसके परिजनों को 50 लाख रुपये सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कई ऐसी गरीब सहकारी सभाएं भी मौजूद है, जिनके कर्मचारियों को चार या पांच हजार  मासिक वेतन मिलता है,  जिससे उनके घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता है। यदि भगवान न करे उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो जाए तो उसके परिवार को न तो सरकार कुछ देगी न ही सहकारी सभा के प्रतिनिधि उसके लिए कुछ कर पाएंगे। उसके परिवार का बेड़ा गर्क हो जाएगा।

सरकार प्रदेश के लगभग 15 हजार कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग को भी पूरा नहीं करती है जबकि सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कई सालों से ईमानदारी से ये कर्मचारी सीमित साधनों व वेतन में खुशी खुशी चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी सभाओं के कर्मचारी क्यूआर कोड पीओएस माध्यम से पिछले साल कोरोना संकटकाल की तरह ही  राशन देने को तैयार है, लेकिन बायोमीट्रिक मशीन के ऊपर उपभोक्ताओं के अंगूठे नहीं लगाएंगे। इससे खतरा हो सकता है। कर्मचारियों ने निर्णय लिया है कि 16 मई तक कोई भी राशन वितरण नहीं करेगा।