शिमला, प्रकाश भारद्वाज। Himachal Electricity Supply, देश के कई राज्य कोयले की आपूर्ति बाधित होने के कारण विद्युत संकट में घिर गए हैं, इस तरह के किसी संकट की राज्य में अभी कोई संभावना नहीं है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश की जल विद्युत पर निर्भरता है और प्रदेश पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग माध्यम से विद्युत का आदान-प्रदान करता है। आमतौर पर हिमाचल गर्मियों में पूरी क्षमता के साथ विद्युत उत्पादन करता है और बैंकिंग प्रणाली में पड़ोसी राज्यों को उपलब्ध करवाता है। उसके बाद सर्दियों में विद्युत उत्पादन घटने की स्थिति में बैंकिंग में दी गई विद्युत वापस ली जाती है। यहां पर अभी किसी प्रकार के विद्युत संकट गहराने की संभावना कम है। राज्य की दैनिक विद्युत आवश्यकता डेढ़ हजार मेगावाट है, जिसके तहत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं और उद्योग की जरूरत पूरी होती है।

राज्य में इस समय प्रदेश सरकार की विद्युत विक्रय करने वाली एजेंसियां राज्य ऊर्जा विभाग व ऊर्जा निगम दोनों मिलकर 448 मेगावाट और 276 मेगावाट विद्युत बेच रहे हैं। ये विद्युत राष्ट्रीय विद्युत विक्रय केंद्र पर मौजूद 96 ब्लॉक में हर पंद्रह-पंद्रह मिनट के लिए खरीद होती है। जिस राज्य को खरीदनी होती है, तुरंत उपलब्ध विद्युत को क्रय करता है। इस तरह से प्रति यूनिट 16.50 रुपये मूल्य प्राप्त हो रहा है। लंबी अविध में यही विद्युत तीन से चार रुपये प्रति यूनिट मूल्य पर बिकती है।

25 वर्ष से अधिक का करार

1500 मेगावाट विद्युत उत्पादन करने वाला सतलुज जल विद्युत निगम टाटा जैसे दूसरे कई ग्राहकों को कम से कम 25 वर्ष के करार के तहत विद्युत आपूर्ति करता है। लंबी अवधि के लिए विद्युत आपूर्ति करने वाले विद्युत उत्पादकों में एनएचपीसी शामिल है। बीबीएमबी छह दशक पुराने अंतर्राज्यीय करार के तहत राजस्थान, हरियाणा, पंजाब को विद्युत आपूर्ति करता है।

दस हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन में हिस्सेदारी

राज्य में जल विद्युत परियोजनाएं दस हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन करती हैं। राज्य विद्युत बोर्ड 389 मेगावाट उत्पादन करती हैं। 448 मेगावाट विद्युत उत्पादन ऊर्जा विभाग और 276 मेगावाट राज्य ऊर्जा निगम करता है। बड़ी क्षमता में संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम सतलुज जल विद्युत निगम, एनएचपीसी सहित दूसरे उपक्रम साढ़े सात हजार मेगावाट विद्युत उत्पादित करते हैं। राज्य में 300 लाख यूनिट अधिकतम उत्पादन होता है और 287 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन हुआ।

जानिए क्‍या कहते हैं अधिकारी

  • निदेशक राज्य ऊर्जा विभाग श्रषिकेश मीणा हिमाचल प्रदेश में विद्युत संकट कभी भी गहराने की संभावना कम है। इसके पीछे कारण ये है कि राज्य में स्थापित जल विद्युत परियोजनाओं से राज्य को बारह फीसद विद्युत बतौर रायल्टी के रूप में मिलती है। इसके अतिरिक्त विद्युत उत्पादन के पीक समय में प्रदेश सरकार दूसरे राज्यों को इस शर्त पर विद्युत देता है, सर्दियों में जरूरत पडऩे पर वापस ली जाती है। इस तरह की व्यवस्था पंजाब, हरियाणा और ग्रिड के साथ भी रहती है। यूं भी कहा जा सकता है कि सरकार को जरूरत पडऩे पर स्थानीय स्तर पर जल विद्युत परियोजनाओं से विद्युत क्रय की जा सकती है।
  • अतरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा आरडी धीमान ने कहा देश के जिन राज्यों में कोयले की कमी के कारण विद्युत संकट गहराया है। उस तरह की कोई संभावना यहां पर नहीं है। हमारे पास राज्य की जरूरत को देखते हुए पर्याप्त विद्युत उपलब्ध है। राज्य की दैनिक खपत की बात की जाए तो घरेलू उपभोक्ताओं व उद्योगों के लिए डेढ़ हजार मेगावाट विद्युत की जरूरत रहती है। इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma