विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पालमपुर में ऑनलाइन मंगवाई मिठाई में लगी थी फफूंद, शिकायत पर हरकत में आई डिलीवरी कंपनी; खाद्य सुरक्षा पर सवाल

By Dinesh Katoch Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 14 Oct 2026 03:35 PM (IST)

पालमपुर में ब्लिंकिट से मंगवाई गई हल्दीराम की मोदक मिठाई में फफूंद मिली, जिससे ऑनलाइन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर ...और पढ़ें

पालमपुर में फफूंद लगी मिठाई डिलीवर कर दी गई।

पालमपुर में फफूंद लगी मिठाई डिलीवर कर दी गई।

HighLights

  1. ब्लिंकिट से ऑर्डर की मोदक मिठाई में फफूंद मिली।

  2. ग्राहक की शिकायत पर कंपनी ने तुरंत रिफंड किया।

  3. ऑनलाइन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।

संवाद सूत्र, पालमपुर (कांगड़ा)। ऑनलाइन किराना डिलीवरी और रोजमर्रा की जरूरत सेवा ब्लिंकिट के माध्यम से मंगवाई गई हल्दीराम की मोदक मिठाई पर फफूंद जमी थी। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में कंपनी की सेवाएं शुरू होने के कुछ ही दिन बाद सामने आई इस घटना ने ऑनलाइन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

नगर निगम के वार्ड नंबर दो की निवासी पूर्वा के अनुसार उन्होंने 14 अक्टूबर को सुबह करीब 10:13 बजे ब्लिंकिट एप के माध्यम से 215 ग्राम हल्दीराम मोदक का ऑर्डर किया था। मिठाई की कीमत 235 रुपये और हैंडलिंग शुल्क पांच रुपये था जिसका भुगतान 240 रुपए ऑनलाइन माध्यम से किया गया। 

खाने योग्य नहीं थी मिठाई

कंपनी के राइडर ने करीब दस मिनट में सुबह 10:22 बजे ऑर्डर उनके घर पहुंचा दिया। ग्राहक के मुताबिक मिठाई का डिब्बा खोलने पर उसमें रखे सभी मोदकों पर फफूंद लगी हुई दिखाई दी। मिठाई खाने योग्य नहीं थी।

कस्टमर केयर पर की शिकायत

इसके बाद उन्होंने तुरंत ब्लिंकिट के कस्टमर केयर पर शिकायत दर्ज करवाई। कंपनी की ओर से ऑर्डर का विवरण मिठाई की तस्वीरें और अन्य जानकारियां मांगी गईं। सुबह 10:37 बजे ग्राहक को कंपनी की ओर से फोन आया, जबकि 10:48 बजे राइडर मिठाई का डिब्बा वापस ले गया। ग्राहक के अनुसार सुबह करीब 11 बजे ऑनलाइन माध्यम से पूरी राशि वापस कर दी गई।

भंडारण व गुणवत्ता पर सवाल

बता दें कि ब्लिंकिट ने पालमपुर में दो अक्टूबर 2026 से अपनी सेवाएं शुरू की हैं। ऐसे में सेवा शुरू होने के महज कुछ दिनों बाद ही पैक्ड मिठाई में फफूंद मिलने की घटना ने खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच और भंडारण प्रक्रिया पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है। हालांकि, यह स्पष्ट होना भी जरूरी है कि उत्पाद की निर्माण एवं समाप्ति तिथि क्या थी और डिलीवरी से पहले उसके भंडारण तथा गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई थी।

शिकायत पर तत्काल रिफंड देना ग्राहक को राहत जरूर देता है, लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़े ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जांच और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाना भी जरूरी है।

यह भी पढ़ें: हिमाचल के दूरदराज क्षेत्र में भी जंक फूड की ओर रुझान, 337 छात्रों पर हुए अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले पहलू