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शिमला, जेएनएन। प्रदेश में एसएमसी शिक्षकों की भर्ती पर फिलहाल ब्रेक लग गई है। सरकार की ओर से हाईकोर्ट को दिए आश्वासन में कहा गया कि कोर्ट के आगामी आदेश तक प्रदेश के सरकारी स्कूलों में किसी भी नए एसएमसी अध्यापक की नियुक्ति अथवा चयन नहीं किया जाएगा। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी व न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने एसएमसी नीति के तहत शिक्षकों की भर्ती के खिलाफ दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि तीन सप्ताह के भीतर प्रदेश में एसएमसी नीति के तहत अभी तक लगाए गए अध्यापकों का पूरा ब्यौरा कोर्ट के समक्ष रखें।

कोर्ट ने शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या व उन्हें आरएंडपी नियमों के तहत भरने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने कहा स्टाफ गैप अरेंजमेंट के नाम पर की जा रही एसएमसी भर्तियां कतई प्रशंसनीय कदम नहीं है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान खेद प्रकट किया कि सरकार हर बार कोर्ट को नियमों के तहत शिक्षकों की भर्तियां करने का आश्वासन देती है, परंतु इसके सार्थक परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं।

कोर्ट ने पाया कि एसएमसी भर्तियां न केवल सरकार के अपने निर्णयों के विरुद्ध हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ भी हैं। प्रार्थी कुलदीप कुमार व अन्यों द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया है कि राज्य सरकार द्वारा की गई एसएमसी शिक्षकों की भर्ती गैरकानूनी है। प्रार्थियों ने हाल ही में जारी अधिसूचना को रद्द करने व भर्ती प्रक्रिया को अंजाम न देने की गुहार लगाई है। प्रार्थियों ने 17 जुलाई 2012 को जारी एसएमसी शिक्षक भर्ती नीति व इसे पूरे प्रदेश में लागू करने के 16 अगस्त 2014 के आदेश के साथ साथ समय-समय पर इस संदर्भ में जारी सरकारी आदेश को निरस्त करने की मांग की है। मामले पर सुनवाई पांच सितंबर को होगी।

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Posted By: Rajesh Sharma

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