संवाद सहयोगी, पालमपुर : उपमंडल के कसौटी एवं दैहण गांव की 600 कनाल भूमि को सिंचित करने वाली 'सरनाले का चाऊ' कूहल बंद होने से खेत बंजर होने लगे हैं। इससे किसानों को आर्थिक रूप से हानि उठानी पड़ रही है। छह साल से बंद कूहल को बहाल करने के लिए ग्रामीण विभागीय अधिकारियों के आगे गुहार लगाकर थक चुके हैं। सदियों से चल रही कूहल को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने यह कहकर कुछ दिनों के लिए बंद किया था कि मार्ग का कार्य समाप्त होते ही कूहल को दोबारा बनाकर चालू कर दिया जाएगा, मगर छह साल बीत जाने के बाद भी कूहल बहाल नहीं हो पाई है। लोगों का कहना है कि हालांकि रेल विभाग ने भी कई दशक पूर्व इस कूहल को सुचारू रूप से चलाने के लिए रेलवे लाइन में ओवर हैड ब्रिज का निर्माण कर ग्रामीणों की ¨सचाई सुविधा बहाल रखी थी। अब ग्रामीणों ने कूहल की बहाली के लिए आंदोलन की धमकी दी है। गांववासियों त्रिलोक चंद, प्रताप चंद, गोवर्धन ¨सह, ध्रुव ¨सह, धर्म चंद, आत्मा राम, विशाल महंत, अजय कुमार व सु¨रद्र कुमार ने कहा कि यदि विभाग ने कूहल का कार्य शीघ्र शुरू नहीं किया तो किसानों की सैंकड़ों कनाल भूमि बंजर हो जाएगी। उन्होंने दोनों विभागों के विरुद्ध आंदोलन छेड़ने का भी ऐलान किया। ग्रामीणों का कहना है कि कई दशकों से चल रही कूहल को लेकर आइपीएच विभाग का रवैया भी सकारात्मक नहीं है। विभाग इसे ग्रामीणों की निजी कूहल कहकर पल्लू झाड़ रहा है।

..............

कई दिनों से बंद कूहल की सूचना ग्रामीणों की ओर से मिली है। शीघ्र ही कमेटी गठित कर कूहल की बहाली की संभावनाएं तलाशी जाएंगी तथा इसे सुचारू बनाया जाएगा।

-अजय शर्मा, सहायक अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण

.............

यह कूहल आइपीएच विभाग के अंतर्गत नहीं आती है। लोगों की निजी कूहल में विभाग का दखल वाजिब नहीं है।

-दिनेश लोहिया, अधिशाषी अभियंता आइपीएच

Edited By: Jagran