संवाद सहयोगी, महारल : उपमंडल बड़सर के कई इलाकों में जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली लोगों की समझ से परे है। विभाग की ओर से पेयजल सप्लाई के लिए बिछाई जाने वाली पाइपें कई स्थानों पर खुले में बिछाई गई है। इन पाइपों से खुले में पेयजल व्यर्थ बहता रहता है, लेकिन संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के ध्यान में मामला लाए जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जाता है।

महारल क्षेत्र में पिछले कई दिनों से टूटी पाइप से पानी व्यर्थ बह रहा है। इलाके में पेयजल किल्लत के बावजूद इसकी बर्बादी लोगों को रास नहीं आ रही है। पेयजल पाइपलाइन नियमों के मुताबिक जमीन से एक से डेढ़ फीट नीचे दबाई जानी चाहिए, लेकिन महारल क्षेत्र में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पाइपें खुले में बिछा दी गई हैं। सड़क किनारे बिछी इन पाइपों के कारण एक तरफ जहां हर वक्त दुर्घटना का खतरा बना रहता है। वहीं दूसरी तरफ पाइपें टूटकर पेयजल बर्बादी का कारण बन रही हैं। ऐसे में लोगों का सवाल है कि बूंद-बूंद बचाने की नसीहत देने वाला जल शक्ति विभाग आखिर क्यों इस समस्या के समाधान बारे में गंभीर नहीं दिखाई देता है। लोगों ने विभागीय अधिकारियों से पेयजल बर्बादी को रोकने व पाइपों के उचित रखरखाव की अपील की है।

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आपके माध्यम से समस्या के बारे में ज्ञात हुआ है। शीघ्र ही समाधान के प्रयास किए जाएंगे। पिछले दिनों बिजली सप्लाई बाधित रहने से जलस्त्रोतों से पानी लिफ्ट नहीं हो पाया था इसलिए पेयजल समस्या आ रही है। इसे भी शीघ्र दूर किया जाएगा।

-अनिल धीमान, कनिष्ठ अभियंता

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