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सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने पर सर्वेश को हिमाचल के राज्यपाल ने किया सम्मानित, युवाओं से किया आह्वान

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 24 Sep 2026 12:47 PM (IST)

हमीपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए स्वदेशी 'रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' ड्रोन विकसित करने के लिए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सम्मानित किया।

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से सम्मान प्राप्त करते सर्वेश शर्मा व उनके माता-पिता। साथ में उपायुक्त गंधर्व राठौड़ व एसपी बलबीर सिंह।

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से सम्मान प्राप्त करते सर्वेश शर्मा व उनके माता-पिता। साथ में उपायुक्त गंधर्व राठौड़ व एसपी बलबीर सिंह।

HighLights

  1. सर्वेश शर्मा को स्वदेशी 'रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' ड्रोन के लिए सम्मान।

  2. रक्षा मंत्रालय से 3.5 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।

  3. राज्यपाल ने युवाओं को नवाचार के लिए प्रेरित किया।

संवाद सहयोगी, हमीरपुर। भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करने वाले हमीरपुर के युवा नवप्रवर्तक व सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सम्मानित किया। सर्वेश को उनके ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए रक्षा मंत्रालय से 3.5 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने भारतीय सेना के लिए स्वदेशी 'रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' ड्रोन विकसित किया है।

राज्यपाल ने सर्वेश शर्मा की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह हिमाचल प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास के लिए सर्वेश के समर्पण, दूरदृष्टि और प्रयासों की प्रशंसा की।

राज्यपाल ने किया छात्र से संवाद

राज्यपाल ने सर्वेश से बातचीत कर ड्रोन की प्रमुख विशेषताओं, इसके विकास के दौरान सामने आई चुनौतियों और परियोजना शुरू करने की प्रेरणा के बारे में जानकारी ली। 

युवाओं से किया आह्वान

राज्यपाल ने प्रदेश के युवाओं से सर्वेश शर्मा की उपलब्धि से प्रेरणा लेकर नवाचार, अनुसंधान, तकनीक और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ और एसपी बलबीर सिंह भी उपस्थित रहे।

पिता ने मजदूरी कर पढ़ाया सर्वेश

सर्वेश के पिता ने उसे दिहाड़ी मजदूरी कर पढ़ाया है। सर्वेश ने पिता की मेहनत का फल दिया है व कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में ही सफलता के झंडे गाढ़ दिए हैं। 

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