विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल: मजदूर के बेटे ने तैयार किया ड्रोन, रक्षा मंत्रालय ने करोड़ों की ग्रांट जारी कर सौंपा सेना का प्रोजेक्ट

By Ranbir Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 22 Sep 2026 04:01 PM (IST)Updated: Tue, 22 Sep 2026 04:42 PM (IST)

हमीरपुर के सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज के छात्र सर्वेश शर्मा ने 87 हजार रुपये में एक ड्रोन तैयार किया है। रक्षा ...और पढ़ें

हमीरपुर के सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज के छात्र सर्वेश शर्मा ने ड्रोन तैयार किया है।

हमीरपुर के सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज के छात्र सर्वेश शर्मा ने ड्रोन तैयार किया है।

HighLights

  1. हमीरपुर छात्र सर्वेश ने बनाया 87 हजार का निगरानी ड्रोन।

  2. रक्षा मंत्रालय ने 3.50 करोड़ ग्रांट दी, रुड़की में विकसित होगा।

  3. दिहाड़ी मजदूर का बेटा अब सेना के लिए ड्रोन बनाएगा।

संवाद सहयोगी, हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज के छात्र ने 87 हजार रुपये में ड्रोन तैयार किया है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग के 5वें सेमेस्टर के छात्र सर्वेश शर्मा के प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय के डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस के तहत 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर की है। अब सर्वेश इस प्रोजेक्ट को आगे विकसित करेगा। सर्वेश के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। दिहाड़ी मजदूर का होनहार बेटा अब सेना के लिए ड्रोन बनाएगा। 

प्रोजेक्ट पर शुरुआती स्तर पर करीब 87 हजार रुपये खर्च हुए हैं। सर्वेश की ओर से तैयार किए जा रहे रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) ड्रोन का उद्देश्य सीमा पर निगरानी में मदद करना है। संस्थान के अनुसार ड्रोन को रडार से बचने और जैमर के प्रभाव से सुरक्षित रखने की तकनीक पर काम किया जा रहा है। 

Sarvesh Sharma Make Drone

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मिला आइडिया

सर्वेश को इस प्रोजेक्ट का विचार आईआईटी जोधपुर और कोनार्क कोर की राष्ट्रीय स्तर की ओपन कार्ड बोर्ड ड्रोन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के दौरान आया। प्रतियोगिता में देशभर के 50 संस्थानों की टीमों ने भाग लिया था। सर्वेश की टीम ने प्रतियोगिता में 10 लाख रुपये का चौथा पुरस्कार हासिल किया था।

इसके बाद उसने सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी चुनौती को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विकसित करने पर काम शुरू किया। 

20 दिन का समय दिया

रक्षा मंत्रालय ने प्रोजेक्ट से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 20 दिन का समय दिया है। प्रोजेक्ट का इनक्यूबेशन सेंटर आईआईटी रुड़की में बनाया गया है, जहां सर्वेश आगे इस पर काम करेगा। प्रोजेक्ट को 20 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पिता दिहाड़ी मजदूरी कर पढ़ा रहे

सर्वेश शर्मा बाहनवीं गांव के साधारण परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता संजीव शर्मा दिहाड़ी-मजदूरी करते हैं। सर्वेश ने प्रारंभिक से लेकर सेकेंडरी स्तर तक की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाहनवीं से की है। उसकी उपलब्धि पर पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष समीर भारती और अन्य शिक्षकों ने बधाई दी है।

यह भी पढ़ें: हिमाचल की सुक्खू सरकार 19 से 27 वर्ष के युवाओं को देगी पॉकेट मनी, सुख शिक्षा योजना के तहत मिलेगा लाभ