धर्मशाला, जेएनएन। जोनल अस्पताल धर्मशाला प्रशासन ने गायनी विशेषज्ञों की तैनाती की मांग करने वालों का मुंह बंद करने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत दो निजी गायनी विशेषज्ञों की तैनाती तो की है, लेकिन सेवाओं के नाम पर किए जा रहे खर्च का कोई अर्थ नहीं दिख रहा है। अस्पताल प्रशासन ने आज दिन तक यह बात सार्वजनिक ही नहीं की है कि निजी गायनी विशेषज्ञ सेवाएं कब देंगे।

पहले सप्ताह के चार दिन निजी चिकित्सकों ने गायनी ओपीडी में भी सेवाएं दी, लेकिन उसके बाद अचानक ओपीडी में बैठना बंद कर दिया। इस पर अस्पताल प्रशासन मरीजों को तर्क दे रहा है कि डॉक्टर केवल ऑनकॉल ही तैनात किए गए हैं। रविवार देर रात धर्मशाला क्षेत्र की एक महिला को प्रसव के लिए अस्पताल लाया गया था। महिला के परिजन रात दस बजे से निजी गायनी विशेषज्ञों को ऑनकॉल बुलाने के लिए कहते रहे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इस बाबत कोई कार्रवाई नहीं की। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि गायनी विशेषज्ञ रात को दस से सुबह पांच बजे तक ऑनकॉल बुलाने का प्रावधान नहीं है। इसके बाद गर्भवती महिला लेबर रूम में प्रसव पीढ़ा सहन करती रही।

मामला गंभीर होता देखकर अस्पताल प्रबंधन ने महिला को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा रेफर करने की योजना बनाई, लेकिन तब तक महिला ने नवजात को जन्म दे दिया। नवजात की तबीयत बिगडऩे के बाद शिशु रोग विशेषज्ञ को बुलाना पड़ा। अभी नवजात की हालत नाजुक बताई जा रही। उधर धर्मशाला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश महाजन ने कहा कि निजी गायनी विशेषज्ञों से रात के दस से सुबह पांच बजे तक ऑनकॉल न बुलाने का करार हुआ है।

 

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