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'जीते तो सब ठीक, हारे तो EVM खराब', अनुराग ठाकुर बोले- मृत्यु या फर्जी नाम हटने पर हंगामा क्यों?

Published: Mon, 12 Oct 2026 09:14 AM (IST)

अनुराग ठाकुर ने ईवीएम और मतदाता सूची विवाद पर विपक्ष को घेरा, कहा हारने पर ही संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल ...और पढ़ें

EVM और वोटर लिस्ट विवाद पर बोले अनुराग ठाकुर।

EVM और वोटर लिस्ट विवाद पर बोले अनुराग ठाकुर।


HighLights

  1. विपक्ष हारने पर ही ईवीएम, संस्थाओं पर सवाल उठाता है

  2. मृत या फर्जी नाम हटने पर हंगामा क्यों, पूछा ठाकुर ने

  3. लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश, बोले अनुराग ठाकुर

जागरण संवाददाता, धर्मशाला। सांसद अनुराग ठाकुर ने मतदाता सूची और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग झूठ के सहारे राजनीति चमकाना चाहते हैं।

चुनाव में हार मिलने पर संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाना उनकी राजनीतिक रणनीति बन गई है। आरोप लगाया कि ऐसे प्रयासों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

झूठ के पांव नहीं होते हैं

सीजेपी पर सांसद ने कहा कि झूठ के पांव नहीं होते हैं। अनुराग रविवार को गगल में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। बकौल अनुराग, जब कांग्रेस चुनाव जीतती है तो उसे ईवीएम, चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं में कोई खामी नजर नहीं आती, लेकिन हार मिलने पर इन्हीं संस्थाओं को निशाना बनाया जाता है।

देश की जनता सब देख रही है। जिन आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है, उनके सहारे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने से कुछ हासिल नहीं होगा।

विदेशी ताकतों के एजेंडे से लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश

आरोप लगाया कि कुछ लोग विदेशी ताकतों के एजेंडे के अनुरूप भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि उन्होंने युवा मोर्चा से लेकर भाजपा तक विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया है।

आंदोलन करने के लिए प्रशासन से अनुमति लेने और प्रतिभागियों की संख्या बताने जैसी व्यवस्थाओं का पालन करना पड़ता है। कोई भी व्यक्ति कानून और संस्थाओं से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन का अधिकार है, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है।

आंदोलन की आड़ में झूठे आरोप लगाकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना उचित नहीं है। लगातार आंदोलनों से सिस्टम पर सवाल खड़े करना सही नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में बात रखने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।

किन मतदाताओं के नाम हटाए हैं?

मतदाता सूची में नाम काटे जाने के मुद्दे पर सांसद ने सवाल उठाया कि आखिर किन मतदाताओं के नाम हटाए हैं। यदि सूची से मृत व्यक्तियों, डुप्लीकेट मतदाताओं या दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम हटाए हैं तो इस पर आपत्ति का आधार स्पष्ट होना चाहिए।

मतदाता सूची में संशोधन को लेकर विरोध करने वालों को यह बताना चाहिए कि किन नामों को हटाए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है।

उन्होंने दोहराया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात रखनी चाहिए।

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