पंचायत की चेतावनी भी बेअर, लोगों का तर्क खेतीबाड़ी करने के लिए उठाना पड़ रहा जोखिम विक्रांत ठाकुर, सलूणी

विकास खंड सलूणी की ग्राम पंचायत भांदल में बने अंबी झंडुर पुल को टूटे करीब दस माह का समय बीत जाने के बाद भी इसके पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में स्थानीय ग्रामीणों को हर दिन नाले के दूसरे छोर पर पहुंचने के लिए टूटे पुल को पार करना पड़ रहा है। पुल की वर्तमान हालत ऐसी है कि उसे पार करने में काफी जोखिम है। यहां हालत ऐसे हैं कि जरा सी चूक भी जान पर भारी पड़ सकती है। बीते जनवरी माह में हुई बर्फबारी के दौरान पुल पर पेड़ गिरने से यह बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद यहां पर पंचायत प्रधान द्वारा साफ तौर पर लिखा गया था कि पुल पर आवाजाही करना वर्जित है, लेकिन, बावजूद इसके लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुल को पार कर रहे हैं। स्थानीय गांव के लोगों का पुल की दूसरी तरफ खेतीबाड़ी का काम है। साथ ही वे जंगल से लकड़ियां व मवेशियों के लिए घास लाने के लिए भी इसी पुल का उपयोग करते हैं। महिलाओं ने बताया कि न तो पुल की मरम्मत करवाई गई और न ही यहां पर नए पुल का निर्माण किया गया है। ऐसे में उन्हें रोजाना अपनी जान को जोखिम में डालकर आना जाना पड़ता है। उन्होंने बताया की जब से यह पुल टूटा है, तब से उन्हें अपने मवेशियों को दूसरी तरफ ले जाने में काफी दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि पुल को पार न करने की चेतावनी लिखी गई है। लेकिन, जब तक पुल नहीं बनेगा, तब तक उन्हें मजबूरन इसी रास्ते से जाना पड़ता है।

पिछली बर्फबारी के दौरान पेड़ गिरने से यह पुल टूट गया था। इसलिए यहां पर साफ तौर पर लिख दिया गया था कि इस पुल से आना जाना वर्जित है। यहां पर तारें भी लगा दी गई थी। लेकिन, लोगों ने तारे तोड़कर इस पुल को पार करना शुरू कर दिया है।

याकूब मागरा, प्रधान ग्राम पंचायत भांदल।

Posted By: Jagran

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