डिब्बे में सिर फंसने से भटकते हुए डलहौजी शहर में पहुंच गया भालू, दहशत में भागने लगे पर्यटक और स्थानीय लोग
हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में एक भालू के सिर में कंटेनर फंसने से वह रिहायशी इलाके में भटक गया, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों में दहशत फैल गई।

सिर में डिब्बा फंसने से डलहौजी शहर में पहुंच गया भालू और रेस्क्यू का प्रयास करती टीम।
HighLights
भालू का सिर कंटेनर में फंसने से डलहौजी में दहशत।
वन विभाग ने एक घंटे में भालू को सुरक्षित बचाया।
स्वस्थ भालू को प्राकृतिक जंगल में वापस छोड़ा गया।
संवाद सहयोगी, डलहौजी (चंबा)। हिमाचल प्रदेश के अहम पर्यटन स्थल डलहौजी में शनिवार को उस समय भारी अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया, जब सिर में प्लास्टिक का डिब्बा फंसने पर काले रंग का भालू रिहायशी इलाके में पहुंच गया। कंटेनर में मुंह और आंखें बुरी तरह फंस जाने के कारण भालू को रास्ता नहीं दिखाई दे रहा था, जिस कारण वह बदहवास होकर इधर-उधर भटक रहा था।
आबादी के बीच और मुख्य बस अड्डे के समीप तड़पते भालू को देखकर स्थानीय निवासियों और पर्यटकों में हड़कंप मच गया और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर सहम गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्लास्टिक का डिब्बा सिर पर इस कदर जकड़ा हुआ था कि भालू लगातार छटपटा रहा था और सांस लेने में भी असमर्थ दिख रहा था।
वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
स्थानीय दुकानदारों व लोगों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बिना समय गंवाए इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान बस अड्डे के समीप लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए वन कर्मियों ने लोगों से उचित दूरी बनाए रखने का आग्रह किया।
एक घंटे की मशक्कत के बाद रेस्क्यू सफल
रेस्क्यू टीम ने बेहद सूझबूझ और सावधानी के साथ अभियान शुरू करते हुए पहले भालू को नियंत्रित किया। इसके बाद करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विशेषज्ञ कर्मियों ने भालू के सिर में फंसे प्लास्टिक के मजबूत डिब्बे को सुरक्षित तरीके से काटकर बाहर निकाला। सिर से डिब्बा हटते ही भालू ने राहत की सांस ली।
स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने पर टीम ने उसे आबादी से दूर घने प्राकृतिक जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया, तब जाकर स्थानीय लोगों व पर्यटकों ने राहत की सांस ली।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने भालू को बिना कोई नुकसान पहुंचाए डिब्बे को सफलतापूर्वक अलग किया। भालू पूरी तरह स्वस्थ था, जिसे उसके प्राकृतिक वास जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। लोगों और होटल व्यवसायियों से विशेष आग्रह है कि वे खुले में प्लास्टिक के डिब्बे, बोतलें या खाद्य सामग्री का कचरा बिल्कुल न फेंकें। भोजन की तलाश में ही वन्य जीव आबादी की ओर रुख करते हैं और ऐसे हादसों का शिकार बनते हैं।
-कुलदीप जम्वाल, डीएफओ (वन मंडल अधिकारी), डलहौजी।
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