संवाद सहयोगी, घुमारवीं : घुमारवीं की सड़कों पर पैदल चलना खतरे से खाली नहीं है। लोगों को यह खतरा वाहनों से नही बल्कि घुमारवीं की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं से ज्यादा हो गया है। यह आवारा पशु आने जाने वाले राहगीरों के लिए दिक्कत खड़ी कर देते है। इनकी तादाद लगातार बढ़ रही। इसलिए समय रहते समस्या का समाधान हो।

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संजू कुमार का कहना है कि लावारिस पशुओं के डर से किसान खेती करना छोड़ रहे हैं। सरकार समस्या के लिए ठोस कदम उठाए।

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श्याम लाल का कहना है कि सरकार को पशुओं को लावारिस छोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। घुमारवीं में इनकी तादाद लगातार बढ़ रही है।

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मुकेश का कहना है कि दिन में यह पशु गांव के खेलों में घुस जाते है और शाम को सड़को पर आ जाते हैं। रात के समय कई बार हादसों का कारण बन रहे हैं।

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सुरेंद्र का कहना है कि सरकार ने गोसदन खोलने की बात कही थी। उसके लिए अबढानीघाट में जमीन देखी गई थी लेकिन आज तक उस पर कोई काम नहीं हुआ।

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अनिल कुमार का कहना है कि अगर सरकार सख्ती से काम करे तो लोग पशुओं को नही छोड़ेंगे। ढीले रवैये के कारण ही लोग पशुओं को लावारिस छोड़ रहे हैं।

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संजय कुमार का कहना है कि घुमारवीं में आवारा पशुओं ने आतंक मचाया हुआ है। पंचायत स्तर पर सभी पशुओं का पंजीकरण होना चाहिए।

Posted By: Jagran