राजेश्वर ठाकुर, बिलासपुर

केंद्र से 14वें वित्तायोग के तहत लगभग तीन साल में करोड़ों रुपये की ग्रांट मंजूर होने के बावजूद इसका प्रयोग ग्रामीण विकास के लिए नहीं हो पा रहा है। कसूरवार चाहे ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अफसर हों या पंचायतों का संचालन करने वाले चुने हुए नुमाइंदे और पंचायत सचिव, लेकिन इसका सीधा नुकसान आम जनता का हो रहा है।

बिलासपुर जिले में विकास खंडों में इस पैसे को खर्च करने के लिए तय प्रक्रिया को पूरा करने में विभागीय अधिकारियों की सुस्ती का कोई सानी नहीं है। महीनों तक फाइलें या तो बीडीओ के कार्यालयों से पंचायत घरों तक नहीं पहुंचती हैं। अगर पंचायतघरों में चली गई तो वहां पर या तो चुने हुए नुमाइंदों या विभाग के कर्मचारियों में तालमेल नहीं होने के कारण महीनों तक पड़ी रहती हैं। या फिर ग्राम सभा की बैठकों में कोरम पूरा नहीं होने से ग्राम पंचायत डेवेलपमेंट प्लान बनाने की तमाम योजनाएं ठंडे बस्ते में चली जा रही हैं। बडी बात यह है कि जिले में ग्रामीण विकास की रफ्तार तय करने के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसकी परवाह नहीं है। यही वजह है कि केंद्र ने हाल ही में एक पत्र लिखकर बिलासपुर जिले में खर्च नहीं हुए वित्तायोग के करोड़ों रुपये को वापस करने के लिए भी विभाग को कहा है।

जिला पंचायत अधिकारी राजेंद्र धीमान मानते हैं कि बिलासपुर जिले में विकास खंडों के पास समय पर पंचायतों से ग्राम पंचायत डेवेलपमेंट प्लान ही नहीं आ रहे हैं। अब तक इस वित्त सत्र के प्लान भी उन तक नहीं पहुंचे हैं। जबकि सितंबर शुरू हो गया है। उन्होंने माना कि बिलासपुर जिले में वर्तमान में पिछले वित्त सत्रों का भी पैसा खर्च करना बाकी है। ऐसे कई पंचायतों में अब तक पैसा जरा भी खर्च नहीं हुआ है। केंद्र से पत्र आया है कि जिस भी पंचायत के पास पैसा खर्च करने का कोई ठोस कारण नहीं है उससे पैसा वापस लिया जाए। इस संबंध में सभी बीडीओ को पहले ही अवगत करवा दिया गया है।

बिलासपुर जिले में करीब डेढ़ सौ ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों में केंद्र की ओर से 14वें वित्तायोग की ओर से अब तक तीन साल में करोड़ों रुपये दिए गए हैं। कुछ साल से तो यह पैसा सीधे पंचायतों के खाते में ही जा रहा है। इस पैसे को खर्च के लिए पंचायतों को अपनी आम सभाओं की बैठकों में ग्राम पंचायत डेवेलपमेंट प्लान बनाने होते है, जिन्हें मंजूरी के लिए बाद में बीडीसी व जिला परिषदों में भेजना पड़ता है। तीन साल से इस पैसे को खर्च करने और करवाने में शामिल पंचायतीराज विभाग बुरी तरह से फिसडडी साबित हो रहा है।

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इन विकास खंडों में खर्च नहीं हुआ पैसा

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक स्वारघाट विकास खंड के तहत अब तक करीब तीन करोड़, सदर विकास खंड में लगभग छह करोड़, झंडूता के तहत करीब छह करोड़ रुपये तथा घुमारवीं में छह करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि पंचायतों के खाते में पड़ी है। अब तक इस राशि का व्यय प्रतिशत करीब 49 प्रतिशत रहा है। सूत्रों का कहना कि डीआरडीए की ओर से भी इस मामले में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई जाती है।

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विभाग व प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान : सुभाष

हटवाड वार्ड के जिला परिषद सदस्य सुभाष ठाकुर ने कहा विभाग व प्रशासन के कारण ही आज यह हालात पैदा हुए हैं। इस वर्ष के भी प्लान नहीं आने के कारण जिला परिषद की बैठक अब तक दो बार रद करनी पड़ी है।

Posted By: Jagran