जागरण टीम, जाटी/घुमारवीं/ बिलासपुर : कुछ साल पहले सहकारिता विभाग बिलासपुर जिले में तैनात रहे एक रिटायर्ड अधिकारी रिटायरमेंट के बाद विभागीय जांच के शिकंजे में आ गए हैं। उन पर अपने ही कार्यकाल में विभाग को मंजूर किए गए किसी प्रोजेक्ट के पैसे की बंदरबांट करने तथा इसमें मंजूर पैसे का बेतहाशा खर्च करने के आरोप हैं। मजेदार बात यह है शिकायत करने वाला भी रिटायर्ड अधिकारी है। दोनों ने एक ही कार्यालय में काम भी किया है। सिर्फ यही नहीं बिलासपुर शहर के सहकारी बैंक में तैनात रही एक महिला प्रबंधक को भी रिटायरमेंट के बाद अब अपने कार्यकाल में मनमाने तरीके से एक संस्था को नियमों से हटकर कर्ज बांटने के आरोपों पर विभागीय जांच झेलनी पड रही है।

पहले मामले में राज्य सरकार ने जांच धर्मशाला स्थित विभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार को दी है। बुधवार को सहायक पंजीयक के कार्यालय में पहुंचकर रिटायर्ड अधिकारी के कार्यकाल में संदेह के दायरे में आए कई दस्तावेज खंगाले। कुछ को जांच के लिए कब्जे में लिया।

सूत्रों के अनुसार बिलासपुर जिले से संबंधित एक अधिकारी सहकारिता विभाग में मंजूर एक विशेष अनुदान वाले प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन के दौरान प्रमुख पद पर तैनात रहे हैं। इनके साथ ही जिला अंकेक्षण अधिकारी के पद पर तैनात रहे एक अन्य अधिकारी ने कुछ समय पहले रिटायरमेंट के बाद अब विभाग को पत्र लिखा था कि इस विशेष प्रोजेक्ट में तैनात रहे इस अधिकारी ने इस प्रोजेक्ट के प्रमुख के तौर पर कई सहकारी सभाओं को कथित तौर पर करोडों रुपये की बंदरबांट की है। शिकायत में कहा है जब इस अधिकारी ने इस प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया तो इनमें भी पैसे का खर्च सीमा से कहीं आगे जाकर किया। साथ ही शिकायत में इस अधिकारी के खिलाफ और उनके कार्यकाल में कथित तौर पर अनियमितताएं होने की बातें कहीं गई है। डिप्टी रजिस्ट्रार सुधीर कटोच ने बुधवार को बिलासपुर आकर इस मामले की जांच की तथा रिकार्ड भी कब्जे में लिया।

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दूसरे मामले में बैंक प्रबंधक रही महिला पर आरोप

दूसरा मामला एक महिला बैंक प्रबंधक से जुड़ा है। इस महिला ने बिलासपुर के सहकारी बैंक में रहते हुए एक सोसायटी को करीब 45 लाख रुपये का कर्ज मनमाने तरीके से दे दिया था। अब विभाग इस मामले की भी जांच कर रहा है।

Posted By: Jagran